श्रम कानूनों की उड़ी धज्जियां: कपसदा में हादसे का शिकार हुआ श्रमिक,,,

ई एस आई सी कार्ड न होने से इलाज और मुआवजे के लिए दर-दर भटकने को मजबूर

ब्लाक श्रम सतर्कता समिति मुख्यमंत्री व कलेक्टर से लगाएंगे गुहार

धरसींवा। औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा और कपसदा इस समय न केवल मजदूरों के शोषण का केंद्र बन चुके हैं, बल्कि राज्य की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ा नासूर साबित हो रहे हैं। एक तरफ जहां इन फैक्ट्रियों के भीतर से देश के कोने-कोने से भागे कुख्यात अपराधी निकल रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गरीब स्थानीय मजदूरों को मिलने वाले कर्मचारी राज्य बीमा (ई एस आई सी) के बुनियादी लाभ से पूरी तरह वंचित कर राज्य सरकार के श्रम कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

बता दे कि मुनाफे की अंधी हवस में डूबे उद्योगपतियों और ठेकेदारों के इस खौफनाक गठजोड़ का सबसे सनसनीखेज चेहरा बीते रविवार को सिलतरा के एक उद्योग में उस वक्त सामने आया, जब पुलिस ने दबिश देकर बिहार के एक कुख्यात और वांटेड अपराधी को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी इस बात का पुख्ता सबूत है कि सस्ते श्रम के लालच में कारखाने अब संगीन जुर्म करने वालों की सुरक्षित पनाहगाह बन चुके हैं। बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन के अपराधियों को नाम छुपाकर काम पर रखा जा रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा दांव पर लग चुकी है और ठेका प्रथा के कारण आम मजदूरों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

बॉक्स खबर

सुरक्षा मानकों की अनदेखी और जिमेदारो की रहस्यमयी खामोशी से पिसता मजदूर,,

इस औद्योगिक अराजकता और कानून विरोधी मानसिकता का शिकार हाल ही में कपसदा स्थित एक उद्योग में काम करने वाला ग्राम सड्डू निवासी एक युवा श्रमिक तोरण ध्रुव हुआ। कारखाने के भीतर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के चलते हुए एक भीषण हादसे में इस गरीब युवक के दाएं हाथ की उंगली कटकर अलग हो गई। राज्य सरकार के कड़े नियमों के बावजूद इस उद्योग में मजदूरों का ईएसआईसी कार्ड तक नहीं बनाया गया था, जिसके चलते घायल युवक को कोई सामाजिक या स्वास्थ्य सुरक्षा नहीं मिल सकी। हद तो तब हो गई जब उद्योग प्रबंधन ने इस लहूलुहान श्रमिक का इलाज कराने या मुआवजा देने के बजाय, उसे ‘ठेकेदार का आदमी’ बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया और महज एक खानापूर्ति के तहत इलाज करा कर घर पर बिठा दिया है। आज वह पीड़ित न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है, लेकिन रसूखदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
इस पूरे मामले में जिम्मेदार प्रशासन की रहस्यमयी खामोशी ने इन बेलगाम उद्योगपतियों के हौसले इस कदर बुलंद कर दिए हैं कि जब ‘ब्लॉक श्रम सतर्कता समिति धरसींवा’ ने इस तानाशाही पर प्रबंधन से जवाब मांगा, तो उन्होंने अहंकार में चूर होकर कह दिया कि हमारी ऊपर तक सेटिंग है, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

बेलगाम उद्योग पर तालाबंदी और पीड़ित को मुआवजे के लिए श्रम सतर्कता समिति ने खोला मोर्चा

फैक्ट्रियों में पल रहे इस संगठित अपराध, सरकारी नियमों की अवहेलना और श्रम विभाग की संदेहास्पद भूमिका के खिलाफ अब ब्लॉक श्रम सतर्कता समिति ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। समिति इस पूरे गंभीर मामले को लेकर सीधे सूबे के मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर की चौखट पर गुहार लगाने जा रही है। एक कड़े लिखित शिकायती पत्र के माध्यम से मांग की जाएगी कि राज्य सरकार के श्रम कानूनों को ठेंगा दिखाने वाले और अपराधियों को संरक्षण देने वाले इस निरंकुश उद्योग पर तत्काल तालाबंदी की जाए। साथ ही, पीड़ित तोरण ध्रुव को उसका वाजिब मुआवजा दिलाने और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले हर बाहरी श्रमिक का अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन करवाने के लिए चौतरफा दबाव बनाया जाएगा। अब देखना यह है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन अपराधियों को शरण देने वाले और गरीब का खून बहाने वाले इन रसूखदारों पर कड़ा कानूनी हंटर चलाते हैं या फिर यह औद्योगिक तंत्र इसी तरह कानून को रौंदता रहेगा।

वर्जन

कुछ उद्योगों में मजदूरों को ई एस आई सी की लाभ नही मिलने , बाल श्रम व श्रम शोषण की शिकायत आई है जांच करेंगे, शिकायत सही मिला तो होगी बड़ी कार्यवाही निश्चित,,,

       श्री दीपक सोनवानी
     श्रम निरीक्षक रायपुर छग शासन

वर्जन

फैक्ट्री में दुर्घटना को छुपाना”मामला बेहद गंभीर है व कारखानों में बिना वेरिफिकेशन बाहरी श्रमिकों को रखना सुरक्षा से खिलवाड़ है। पकड़े गए आरोपी पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। सभी उद्योगों को अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन के कड़े निर्देश दिए जा रहे हैं, लापरवाही पर सख्त एक्शन होगा।

श्री राजेन्द्र दीवान
थाना प्रभारी धरसींवा

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