मुंगेली। जिले में अवैध प्लॉटिंग और भू-माफियाओं की मनमानी का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। शिवाजी वार्ड स्थित सच्चीपुरम कॉलोनी और दीनदयाल उपाध्याय वार्ड क्रमांक 22 के रहवासियों ने मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वर्षों से सड़क, नाली, पेयजल और बिजली जैसी आवश्यक सुविधाओं से वंचित रह रहे नागरिकों ने अब जिला प्रशासन और नगर पालिका से न्याय की गुहार लगाई है। वार्डवासियों ने लिखित शिकायत सौंपकर भू-माफियाओं एवं कॉलोनाइजरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
सुनहरे सपने दिखाकर बेचे गए प्लॉट, हकीकत निकली बदहाल जिंदगी
रहवासियों का आरोप है कि करीब 15 से 16 वर्ष पहले भू-माफियाओं और कॉलोनाइजरों द्वारा बड़े-बड़े वादों के साथ प्लॉट बेचे गए। लोगों को भरोसा दिलाया गया कि कॉलोनी में पक्की सड़कें, नालियां, नियमित पेयजल आपूर्ति, बिजली कनेक्शन और अन्य सभी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन आश्वासनों पर विश्वास कर लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर जमीन खरीदी और घर बनाकर बस गए।
लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी अधिकांश वादे अधूरे ही रह गए। जिन सुविधाओं का सपना दिखाकर लोगों से पैसे लिए गए, वे आज भी धरातल पर नजर नहीं आतीं। रहवासी अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
मुनाफा कमाकर गायब हुए कॉलोनाइजर
शिकायतकर्ताओं के अनुसार सच्चीपुरम कॉलोनी में कॉलोनाइजर मोहित लुनिया द्वारा प्लॉटिंग कर बिक्री की गई थी। प्लॉट बिकने के बाद कॉलोनाइजरों ने कॉलोनी विकास से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया। आज वहां 300 से अधिक मकान बन चुके हैं और सैकड़ों परिवार निवास कर रहे हैं, लेकिन विकास कार्य लगभग शून्य है।
दीनदयाल उपाध्याय वार्ड के रहवासियों ने भी इसी तरह की शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि अवैध प्लॉटिंग के जरिए जमीन बेचकर जिम्मेदार लोग करोड़ों का मुनाफा कमा चुके हैं, जबकि आम नागरिक आज बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
नगर पालिका का जवाब— ‘अवैध कॉलोनी है, सुविधा नहीं दे सकते’
सबसे गंभीर आरोप प्रशासन की कार्यप्रणाली पर लग रहे हैं। रहवासियों का कहना है कि जब वे नगर पालिका में सड़क, नाली या पेयजल की मांग लेकर पहुंचते हैं, तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता है कि संबंधित क्षेत्र अवैध प्लॉटिंग या अवैध कॉलोनी के अंतर्गत आता है, इसलिए वहां सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं।
यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है— यदि कॉलोनी अवैध थी, तो वर्षों तक प्लॉट बिक्री और निर्माण कार्य कैसे चलता रहा? प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? और जब अब सैकड़ों परिवार वहां बस चुके हैं, तो उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखना कितना न्यायसंगत है?
कर और बिल वसूली जारी, सुविधाएं अब भी नदारद
वार्डवासियों का कहना है कि एक तरफ नगर पालिका और अन्य विभाग सुविधाएं देने से इंकार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नागरिकों से संपत्ति कर, बिजली बिल और अन्य शुल्क नियमित रूप से वसूले जा रहे हैं। इससे लोगों में भारी आक्रोश है।
रहवासियों का सवाल है कि जब शासन उनसे टैक्स ले सकता है, तो बदले में नागरिक सुविधाएं देने से पीछे क्यों हट रहा है? उनका कहना है कि प्रशासन की यह दोहरी नीति आम जनता के साथ अन्याय है।
बरसात में बढ़ जाती है मुश्किलें
बरसात के मौसम में हालात और विकट हो जाते हैं। कच्चे रास्ते कीचड़ में बदल जाते हैं, नालियों के अभाव में जलभराव की स्थिति बन जाती है और पेयजल संकट गहराने लगता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर घरों तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मूलभूत सुविधाओं की कमी अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा का गंभीर संकट बन चुकी है।
जनप्रतिनिधियों ने भी उठाई आवाज
स्थानीय पार्षद सूरज यादव समेत अनेक जनप्रतिनिधियों ने भी वार्डवासियों की मांग का समर्थन किया है। शिकायत पत्र पर नीलकमल, भूपेंद्र पाठक, हेमंत जगत, यशवंत शर्मा, सूर्यकांत परिहार, रूपेश सोनकर, तथा श्रीगारी पूर्णिकसानी, सुनील सोनी, बिमला रावत, दिलीप सोनी, सुरेश कुमार भास्कर सहित बड़ी संख्या में नागरिकों के हस्ताक्षर हैं।
रहवासियों ने मांग की है कि:
अवैध प्लॉटिंग की निष्पक्ष जांच कराई जाए
दोषी कॉलोनाइजरों एवं भू-माफियाओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई हो
कॉलोनी विकास की लागत जिम्मेदार बिल्डरों से वसूली जाए
सड़क, नाली, पानी और बिजली जैसी सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं
भू-माफियाओं के खिलाफ जनता अब मुखर
कॉलोनीवासियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे। वर्षों तक आश्वासन सुनने के बाद अब जनता ठोस कार्रवाई चाहती है। लोगों का कहना है कि भू-माफियाओं और प्रशासनिक उदासीनता के कारण आम नागरिकों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
यह मामला केवल दो वार्डों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे जिले में अवैध प्लॉटिंग के बढ़ते नेटवर्क और प्रशासनिक निगरानी की कमजोरी को उजागर करता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर कितना त्वरित और प्रभावी कदम उठाता है।
जनता का साफ संदेश है— अब केवल आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए।
