पर्यटन अनुकूल ट्रैफिक व्यवस्था की मांग तेज

काठमांडू में होटल व्यवसायी और पर्यटक दोनों परेशान, ड्रॉप-ऑफ जोन व विशेष पार्किंग व्यवस्था की उठी मांग

काठमांडू (नेपाल)। नेपाल में पर्यटन क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राथमिकता दिए जाने के बावजूद राजधानी काठमांडू के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक क्षेत्रों में ट्रैफिक प्रबंधन अब भी पर्यटक और व्यवसायी अनुकूल नहीं बन पाया है। होटल एवं पर्यटन व्यवसायियों ने सरकार और संबंधित निकायों से पर्यटन मैत्री ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने की मांग की है।जिला होटल व्यवसायी संघ काठमांडू के अध्यक्ष सुरेश बराल ने बताया कि एयरपोर्ट क्षेत्र, शम्भुमार्ग, तिलगंगा, गौशाला, बत्तीसपुतली, पशुपतिनाथ, स्वयम्भूनाथ तथा बौद्ध जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर ट्रैफिक व्यवस्था के कारण प्रतिदिन पर्यटकों और होटल व्यवसायियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।उनके अनुसार, हवाई अड्डे अथवा अन्य मार्गों से होटल पहुंचने वाले अतिथियों को सामान उतारने और चढ़ाने के लिए कुछ मिनट वाहन रोकना भी मुश्किल हो गया है। ट्रैफिक पुलिस की अत्यधिक सख्ती के कारण होटल व्यवसायी और पर्यटक दोनों तनाव का सामना कर रहे हैं।बराल ने कहा कि भारत सहित विभिन्न देशों से बड़ी संख्या में धार्मिक पर्यटक पशुपतिनाथ दर्शन के लिए नेपाल आते हैं। कई पर्यटक बसों और मोटरसाइकिलों के माध्यम से यात्रा करते हैं, लेकिन काठमांडू पहुंचने के बाद पार्किंग की कमी, यात्रियों को उतारने-चढ़ाने के लिए निर्धारित स्थानों के अभाव तथा ट्रैफिक व्यवस्था की अस्पष्टता के कारण उन्हें भारी असुविधा झेलनी पड़ती है।उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट के आसपास शम्भुमार्ग, गौशाला और बत्तीसपुतली क्षेत्रों में होटल अथवा पर्यटक वाहनों के कुछ मिनट रुकने पर भी व्हील लॉक लगा दिया जाता है। कई बार पर्यटकों को लेकर आई बसों को यात्रियों को उतारने के दौरान भी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। इससे पर्यटकों की यात्रा योजनाएं प्रभावित होती हैं और होटल सेवाओं पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।व्यवसायियों का कहना है कि सिनामंगल–गौशाला–तिलगंगा–पशुपतिनाथ कॉरिडोर नेपाल का सबसे व्यस्त धार्मिक एवं पर्यटन क्षेत्र है। इसी मार्ग से विदेशी राजनयिक, धार्मिक पर्यटक, होटल अतिथि और विमान यात्रियों का आवागमन होता है। ऐसे में यहां विशेष ट्रैफिक प्रबंधन व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है।

होटल एवं पर्यटन व्यवसायियों ने सुझाव दिया है कि प्रमुख पर्यटन स्थलों पर होटल तथा पर्यटक वाहनों के लिए अलग से ड्रॉप-ऑफ और पिक-अप जोन निर्धारित किए जाएं। एयरपोर्ट, गौशाला, तिलगंगा और शम्भुमार्ग क्षेत्रों में सीमित समय के लिए वाहन रोकने संबंधी स्पष्ट नियम बनाए जाएं तथा उनका एक समान पालन सुनिश्चित किया जाए।इसके अतिरिक्त अंग्रेजी सहित बहुभाषी ट्रैफिक संकेतक और सूचना बोर्ड लगाए जाएं, पर्यटक बसों एवं होटल वाहनों के लिए सुरक्षित पार्किंग क्षेत्र विकसित किए जाएं तथा ट्रैफिक पुलिस को पर्यटन और आतिथ्य सेवा संबंधी विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि उनकी कार्यशैली अधिक सेवामुखी बन सके।अध्यक्ष सुरेश बराल ने कहा कि नेपाल सरकार पर्यटन आगमन बढ़ाने और धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने की दिशा में कार्य कर रही है तथा वर्ष 2027 को पर्यटन प्रवर्द्धन के लिए महत्वपूर्ण वर्ष के रूप में देख रही है। ऐसे समय में पर्यटकों को नेपाल आगमन से लेकर होटल तक पहुंचने तक सहज, सुरक्षित और सकारात्मक अनुभव प्रदान करना सभी संबंधित पक्षों की साझा जिम्मेदारी है।

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