बलौदाबाजार। कसडोल थाना क्षेत्र के बहुचर्चित प्रकरण में आरोपी बनाए गए पत्रकार विजय शंकर तिवारी को जिला एवं सत्र न्यायालय से जमानत मिल गई है। विशेष सत्र न्यायाधीश अनुसूचित जाति/ जनजाति ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत आवेदन स्वीकार करते हुए रिहाई का आदेश पारित किया।
उल्लेखनीय है कि कसडोल पुलिस ने 28 जून 2026 को अपराध क्रमांक 260/2026 में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करते हुए विजय शंकर तिवारी सहित पांच लोगों को आरोपी बनाया था। प्रारंभिक स्तर पर कसडोल न्यायालय में जमानत आवेदन निरस्त होने के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय में पुनः आवेदन प्रस्तुत किया गया।
पत्रकार विजय शंकर तिवारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीशचंद श्रीवास्तव ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि प्रकरण में उनके मुवक्किल की भूमिका का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विजय शंकर तिवारी एक पत्रकार हैं और उन्होंने शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर समाचार का प्रकाशन किया था, इनका उद्देश्य सिर्फ प्राप्त शिकायत पत्र के अनुसार पीड़ित का समाचार वीडियो प्रकाशन करना था इस दौरान उन्होंने किसी भी प्रकार से ब्लैकमेलिंग, धमकी, पैसो की मांग आदि हेतु किसी से संपर्क नहीं किया अपितु पीड़ित की मदद करने के उद्देश्य से बिना रुके सीधे समाचार वीडियो प्रकाशित किया है l पुलिस की कार्यवाही पर भी तीखी बहस हुई इसके बाद बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर न्यायिक दृष्टि से विचार किया जाना आवश्यक है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश अनुसूचित जाति/ जनजाति ने विजय शंकर तिवारी को जमानत प्रदान कर दी।
गौरतलब है कि इस प्रकरण को लेकर बलौदाबाजार प्रेस क्लब ने हाल ही में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच, पत्रकार विजय शंकर तिवारी के विरुद्ध की गई कार्रवाई की स्वतंत्र समीक्षा तथा छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग भी की है। पत्रकार समुदाय ने जमानत आदेश का स्वागत करते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास का प्रतीक बताया है।
