भारत–नेपाल पर्यटन सेतु: हिमालय की गोद से आस्था, प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत आमंत्रण

नेपाल ने भारतीय पर्यटकों के लिए खोले स्वागत के द्वार, पर्यटन विकास और सुविधाओं को लेकर प्रशासन व पर्यटन क्षेत्र एकजुट

काठमांडू। नेपाल के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रशासनिक अधिकारी, होटल व्यवसायी और पर्यावरण संरक्षण अभियानों से जुड़े व्यक्तित्व भारत-नेपाल पर्यटन संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार सक्रिय हैं। धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटकों की सुविधा को केंद्र में रखकर नेपाल में अनेक योजनाएं और पहल संचालित की जा रही हैं।

पर्यटकों की सुविधा और आतिथ्य के लिए सदैव तत्पर: सुरेश बराल

सुरेश बराल, जिला होटल व्यवसायी संघ काठमांडू ने कहा कि जिला होटल व्यवसायी संघ काठमांडू पर्यटन प्रवर्द्धन के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। पर्यटकों को आरामदायक आवास, बेहतर आतिथ्य और सुविधाजनक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम और अभियान आयोजित किए जाते हैं।उन्होंने भारतीय पर्यटकों का स्वागत करते हुए कहा कि नेपाल आने वाले अतिथियों को सुरक्षित, आरामदायक और यादगार यात्रा अनुभव प्रदान करना उनकी प्राथमिकता है।काठमांडू घाटी और आसपास के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलनेपाल आने वाले पर्यटक निम्नलिखित स्थलों का भ्रमण कर सकते हैं—पशुपतिनाथ मंदिर,गुह्येश्वरी मंदिर,स्वयंभूनाथ स्तूप,शालीनदीबुधनिलकण्ठ,तोखा झरना,चन्द्रागिरि केबल कार,दक्षिणकाली मंदिर,फर्पिङ मठपाटन दरबार स्क्वायर,कृष्ण मंदिरगोदावरी,बसंतपुर दरबार क्षेत्रस्काई टावर,भक्तपुर दरबार स्क्वायर,डोलेश्वर महादेव,संग भन्ज्यांग,नगरकोट,रानी झोलाबुद्ध पार्क,इन स्थलों में धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

भारत-नेपाल संबंधों की मजबूती में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका: दीपेंद्र सुबेदी

दीपेंद्र सुबेदी, सचिव, बागमती प्रदेश, नेपाल सरकार ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक संबंध हैं। दोनों देशों की भौगोलिक परिस्थितियाँ, खान-पान, संस्कृति और परंपराएं कई मायनों में एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।उन्होंने कहा कि भारतीय पर्यटक नेपाल पर्यटन उद्योग की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। इसलिए नेपाल सरकार भारतीय पर्यटकों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनकी यात्रा को सहज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने आश्वस्त किया कि सीमा क्षेत्रों सहित यात्रा के दौरान आने वाली किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए प्रशासन तैयार है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि भारतीय पर्यटकों की सहायता के लिए जल्द ही एक विशेष सूचना एवं सहायता कक्ष (इन्फॉर्मेशन रूम) स्थापित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है।सुबेदी ने भारत और नेपाल के बीच पर्यटन सहयोग को बढ़ावा देने के लिए डॉ. जतिंदर पाल सिंह के साथ चल रही सकारात्मक चर्चाओं पर भी प्रसन्नता व्यक्त की।

नेपाल प्रकृति संस्कृति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम,दामोदर नेपाल

दामोदर नेपाल अध्यक्ष, होटल तथा पर्यटन व्यवसायी संघ नेपाल, बागमती प्रदेश ने कहा कि नेपाल विश्व के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां हिमालय की भव्यता, धार्मिक आस्था के केंद्र, सांस्कृतिक विविधता और आत्मीय आतिथ्य का ऐसा संगम मिलता है जो विश्व में दुर्लभ है।उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के बीच पर्यटन आदान-प्रदान जितना मजबूत होगा, दोनों देशों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध उतने ही सुदृढ़ होंगे। पर्यटन केवल यात्राओं का माध्यम नहीं, बल्कि दो देशों के बीच विश्वास, मित्रता और साझी विरासत को मजबूत करने का सेतु भी है।उन्होंने भारतीय पर्यटकों का हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि नेपाल उनके प्रवास को अविस्मरणीय बनाने के लिए सदैव तैयार है।नेपाल का संदेश: आइए, अनुभव कीजिए हिमालय की आत्मानेपाल के पर्यटन, होटल व्यवसाय और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों का एक स्वर में कहना है कि नेपाल केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक सौंदर्य, सांस्कृतिक समृद्धि और आत्मीय संबंधों का अनुभव है। भारत और नेपाल के बीच बढ़ता पर्यटन सहयोग दोनों देशों की मित्रता को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।इंडो नेपाल टूर इस वेलफेयर सोसाइटी द्वारा नेपाल पर्यटन हेतु प्रयास किया जा रहा है और ग्रुप टूर प्रति महीने लाने की प्रक्रिया की जारी है और पर्यटन को बढ़ावा देने मीडिया और समाचार के माध्यम से ध्यान आकर्षित किया जा रहा है। इसके लिए हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं।”सुन्दर देश नेपालमा हार्दिक स्वागत छ” — आइए, नेपाल की दिव्य आस्था, अद्भुत प्रकृति और समृद्ध संस्कृति का अनुभव करें और अपने जीवन की यादगार यात्रा का हिस्सा बनें।

प्रकृति के प्रहरी पी.के. शेरपा: पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक संदेश

विश्वप्रसिद्ध पर्वतारोही एवं पर्यावरण संरक्षक पी.के. शेरपा पिछले चार दशकों से हिमालय संरक्षण, ग्लेशियर जागरूकता, स्वच्छता अभियान, जीरो-वेस्ट पर्यटन तथा सामुदायिक पर्यावरण शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।उन्होंने फादर एंड सन क्लाइमेट चेंज एक्सपेडिशन (2021) तथा माउंट किलिमंजारो कंजर्वेशन एक्सपेडिशन (2023) सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व किया है।पी.के. शेरपा का मानना है कि पर्यटन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदायों के विकास और वैश्विक जागरूकता का सशक्त साधन भी बन सकता है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भविष्य के निर्माण की प्रेरणा देता है।

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