​सफलता की अनूठी मिसाल ; माता-पिता के संघर्षों को दादरपाली के गौरव ने दिया सम्मान, प्रथम प्रयास में ही क्रैक की NEET 2026 की परीक्षा..

सारंगढ़ बिलाईगढ़// कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और अपनों का साथ हो, तो विपरीत से विपरीत परिस्थितियां भी घुटने टेक देती हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है साल्हेओना के समीपस्थ ग्राम दादरपाली के एक होनहार युवा गौरव पटेल ने। गौरव ने देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में से एक नीट (NEET 2026) में अपने प्रथम प्रयास में ही शानदार सफलता अर्जित कर न सिर्फ अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे अंचल को गौरवान्वित किया है।

​इस वर्ष नीट परीक्षा के आयोजन में आए उतार-चढ़ाव के बीच गौरव ने अपनी प्रतिभा का ऐसा लोहा मनवाया कि दोनों ही बार आयोजित हुई परीक्षा में उन्होंने नीट क्लियर कर अपनी योग्यता को साबित कर दिया।

परिवार में दोहरी खुशी का माहौल

​गौरव की यह सफलता उनके परिवार के लिए बेहद खास और भावुक करने वाली है। उनके पिता डॉ. नंदकुमार पटेल स्वयं चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हैं और डॉक्टरी पेशे के जरिए समाज की सेवा कर रहे हैं। अब उनका बेटा भी डॉक्टर बनने की राह पर अग्रसर हो चुका है। पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए बेटे का मेडिकल क्षेत्र में जाना इस परिवार के लिए दोहरी खुशी लेकर आया है। घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

चुनौतियों से भरा रहा सफर माता बनीं ढाल

​गौरव की यह सफलता जितनी शानदार है, इसके पीछे का संघर्ष उतना ही दिल को छू लेने वाला है। कुछ समय पहले एक हादसे में गौरव के पिता डॉ. नंदकुमार पटेल का पैर टूट गया था, जिसके बाद वे चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हो गए। संकट के इस दौर में गौरव की माता पूर्णिमा पटेल जो समीपस्थ ग्राम दादरपाली के प्राथमिक विद्यालय में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ हैं परिवार की रीढ़ की हड्डी बनीं। पति की अस्वस्थता और घर की तमाम जिम्मेदारियों के बीच श्रीमती पूर्णिमा पटेल ने कभी भी अपने आत्मविश्वास को कमजोर होने नहीं दिया। उन्होंने न केवल घर के कामकाज को अकेले संभाला, बल्कि अपने पति की देखभाल करते हुए बेटे की परवरिश और पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।

​महानगर भेजकर दिलाया बेहतर माहौल

​गौरव की माता पूर्णिमा पटेल ने शिक्षा के प्रति अपने समर्पण भाव का परिचय देते हुए एक साहसिक फैसला लिया। ग्रामीण परिवेश और पारिवारिक संकट के बावजूद, उन्होंने गौरव को बेहतर शिक्षा और सही माहौल देने के लिए बिलासपुर जैसे महानगर भेजा। उन्होंने गौरव को घरेलू चिंताओं से पूरी तरह मुक्त रखा, ताकि वह स्वतंत्र होकर और पूरे फोकस के साथ अपनी पढ़ाई कर सके। माँ के इसी त्याग और अटूट विश्वास का परिणाम आज सबके सामने है। ​अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर गौरव पटेल ने बेहद शालीनता से अपनी माँ के संघर्षों को याद किया।

गौरव ने बताया ​रणनीति और एकाग्रता

बिलासपुर में रहकर उन्होंने बिना भटके हर दिन कड़ी मेहनत की। पिता की स्थिति को देखकर उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा बनाया। ​शिक्षकों का सही मार्गदर्शन और माता-पिता के भरोसे ने उन्हें हर कदम पर ऊर्जा दी।

​गौरव की इस अभूतपूर्व सफलता पर दादरपाली और आस-पास के ग्रामीणों, प्राथमिक विद्यालय के स्टाफ, एवं शुभचिंतकों ने गौरव डॉ. नंदकुमार पटेल और प्रधान पाठक पूर्णिमा पटेल को उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। यह सफलता आंचलिक क्षेत्रों के उन तमाम विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणा है जो अभावों और चुनौतियों के बीच अपने सपनों को सच करना चाहते हैं।

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