16 वर्षों की नृत्य साधना, देश-विदेश में हजारों प्रस्तुतियां और अनेक सम्मान; 72 घंटे के लगातार नृत्य के विश्व रिकॉर्ड का भी हिस्सा
भिलाई। कला के क्षेत्र में छोटी उम्र से शुरू हुई साधना जब जुनून, अनुशासन और निरंतर मेहनत से जुड़ती है, तो वह प्रतिभा को एक अलग मुकाम तक पहुंचाती है। ऐसी ही बहुमुखी प्रतिभा की पहचान हैं मिताली दासगुप्ता, जिन्होंने पिछले 16 वर्षों से भारतीय शास्त्रीय नृत्य, विशेषकर भरतनाट्यम, को अपनी साधना का केंद्र बनाकर देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।मिताली ने अपने नृत्य सफर में देश के लगभग हर प्रमुख राज्य में विभिन्न राष्ट्रीय एवं प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंचों पर प्रस्तुतियां दी हैं। हजारों मंचीय प्रस्तुतियों के साथ उन्हें विभिन्न राज्यों और संस्थाओं द्वारा अनेक राष्ट्रीय एवं विशेष सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उनकी उपलब्धियों में उनके नृत्य समूह द्वारा 72 घंटे तक लगातार नृत्य कर विश्व रिकॉर्ड बनाने की उपलब्धि भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है।अब प्रतियोगी नहीं, विशेष आमंत्रित कलाकार के रूप में पहचानमिताली की कला यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव यह है कि कभी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा सिद्ध करने वाली मिताली आज प्रतियोगिताओं से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक समारोहों और फेस्टिवल में विशेष आमंत्रित कलाकार के रूप में प्रस्तुति दे रही हैं।उनकी निरंतर साधना, मंचीय अनुभव और उपलब्धियों ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया है जहां वे केवल प्रतियोगिता में भाग लेने वाली कलाकार नहीं, बल्कि विशेष प्रस्तुतियों के लिए आमंत्रित की जाने वाली परिपक्व कलाकार के रूप में पहचान बना चुकी हैं।कला के साथ विज्ञान की पढ़ाई भीमिताली की विशेषता केवल उनकी नृत्य प्रतिभा तक सीमित नहीं है। वे कला के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा को भी पूरी गंभीरता से आगे बढ़ा रही हैं।

वर्तमान में वे फॉरेंसिक साइंस में बीएससी (B.Sc. Forensic Science) की पढ़ाई कर रही हैं। इसके साथ ही इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से क्लासिकल डांस—भरतनाट्यम में भी अध्ययन कर रही हैं।इस तरह एक ओर वे विज्ञान जैसे विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गहन परंपरा और तकनीक को भी निरंतर आत्मसात कर रही हैं। विज्ञान और शास्त्रीय कला का यह अनूठा संगम मिताली की बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।हर वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानलगातार बेहतर प्रस्तुतियों और उपलब्धियों के कारण मिताली को हर वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त होते रहे हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुतियां दर्शकों और कला प्रेमियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही हैं।भिलाई में आयोजित ‘रंग तरंग-2026’ एवं 18वें गीतांजलि उत्सव में उनकी प्रस्तुति भी इसी लंबी और गौरवपूर्ण कला यात्रा की एक कड़ी रही। मंच पर पारंपरिक वेशभूषा में भरतनाट्यम की प्रभावशाली प्रस्तुति ने उनकी वर्षों की साधना और कला के प्रति समर्पण को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।16 वर्षों की साधना, हजारों प्रस्तुतियां, देश-विदेश में मिले अनेक सम्मान, 72 घंटे के विश्व रिकॉर्ड का हिस्सा बनने की उपलब्धि और अब प्रतियोगिताओं से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंचों पर विशेष आमंत्रित कलाकार के रूप में पहचान—मिताली दासगुप्ता का यह सफर निश्चित रूप से युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है।
