मुंगेली। मुंगेली में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आम उपभोक्ता बिजली की समस्या से परेशान है, शिकायत दर्ज कराने के घंटों बाद भी मौके पर समाधान नहीं, और ऊपर से जिम्मेदारों की ओर से ऐसे जवाब मिल रहे हैं, जो विभाग की व्यवस्था पर ही सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बिजली संबंधी शिकायत के करीब 3 घंटे बाद भी समस्या का निराकरण नहीं किया गया। उपभोक्ताओं का आरोप है कि विभागीय कर्मचारियों से संपर्क करने पर “कर्मचारी नहीं है”, “मेरा शिफ्ट खत्म हो गया है, आप देख लीजिए” जैसे जवाब दिए जा रहे हैं।
लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता।
जानकारी के अनुसार, बिजली विभाग के ठेकेदार द्वारा विभागीय वाहनों में डीजल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, जिसके चलते बिजली सुधार कार्य में इस्तेमाल होने वाले वाहन भी प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
अब सवाल बेहद सीधा है—
जब बिजली सुधारने वाले वाहनों में ही डीजल नहीं होगा, तो कर्मचारी मौके तक पहुंचेंगे कैसे?
क्या बिजली विभाग की व्यवस्था इतनी लचर हो चुकी है कि उपभोक्ता शिकायत करता रहे, कर्मचारी शिफ्ट खत्म होने का हवाला देते रहें और सुधार कार्य के वाहन ईंधन के अभाव में खड़े रहें?
जनता समय पर बिजली बिल जमा करे, लेकिन बिजली संकट के समय उसे घंटों इंतजार करना पड़े—क्या यही विभाग की जवाबदेही है?
अगर ठेकेदार द्वारा वास्तव में विभागीय वाहनों के लिए डीजल उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय है। आखिर ठेकेदार के साथ किस शर्त पर काम हो रहा है? वाहनों के ईंधन की व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी है? और इस पूरे मामले की निगरानी कौन कर रहा है?
मुंगेली की जनता अब जवाब चाहती है—बिजली विभाग की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा?
एक तरफ घंटों बिजली समस्या से जूझते उपभोक्ता, दूसरी तरफ कर्मचारियों की कमी का हवाला और अब वाहनों में डीजल नहीं होने की बात—अगर ये आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की बदहाली का आईना है।
अब देखना होगा कि बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देते हैं और उपभोक्ताओं को तत्काल राहत तथा व्यवस्था में सुधार के लिए क्या ठोस कार्रवाई करते हैं।
