‘निकोटिन और तंबाकू की लत का पर्दाफाश’ थीम पर आयोजित चैपाल में ग्रामीणों को किया गया जागरूक, युवाओं ने सार्वजनिक रूप से छोड़ा नशा
मुंगेली। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पदमपुर में ‘‘नशामुक्ति संकल्प चैपाल’’ का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम ‘‘निकोटिन और तंबाकू की लत का पर्दाफाश’’ के तहत ग्रामीणों, युवाओं एवं जनप्रतिनिधियों को तंबाकू और निकोटिन युक्त उत्पादों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग ने तंबाकू सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों की जानकारी देते हुए लोगों को नशामुक्त जीवन अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मनीष बंजारा ने कहा कि तंबाकू एक धीमा जहर है, जो व्यक्ति के शरीर को भीतर से खोखला कर देता है। उन्होंने कहा, “नशा है एक अभिशाप, इससे बचे रहें हम और आप, जीवन को करें सुरक्षित।” उन्होंने बताया कि तंबाकू में लगभग सात हजार से अधिक रासायनिक पदार्थ पाए जाते हैं, जिनमें 250 से अधिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तथा 70 से अधिक कैंसर उत्पन्न करने वाले कार्सिनोजेनिक तत्व होते हैं।
उन्होंने कहा कि तंबाकू का सेवन कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों, ब्रोंकाइटिस, त्वचा संबंधी समस्याओं तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी का प्रमुख कारण है। इसके साथ ही यह व्यक्ति के दांतों और संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करता है तथा धीरे-धीरे जीवन की खुशियों को छीन लेता है।
तंबाकू मुक्त गांव बनाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों, युवाओं और महिलाओं को तंबाकू सेवन के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दुष्प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी गई। सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से तंबाकू मुक्त ग्राम निर्माण का संकल्प लिया तथा स्वयं नशे से दूर रहने और समाज को जागरूक करने की शपथ ली।
वक्ताओं ने कहा कि आज नशे की समस्या शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी तेजी से फैल रही है। युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति के कारण कई गांवों की पहचान प्रभावित हो रही है। नशे के कारण घरेलू हिंसा, आपसी विवाद, अपराध और सड़क दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं में वृद्धि हो रही है, जिससे समाज को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
नशामुक्ति से सुरक्षित होगा युवाओं का भविष्य
कार्यक्रम में बताया गया कि नशामुक्ति केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि सामाजिक विकास और सुरक्षित भविष्य की आधारशिला भी है। नशा छोड़ने से युवा शिक्षा, खेल, रोजगार और सकारात्मक गतिविधियों की ओर अग्रसर होते हैं। इससे नई पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित होता है तथा महिलाओं और बच्चों को बेहतर एवं सम्मानजनक वातावरण प्राप्त होता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि नशामुक्त गांवों में सामाजिक एकता, भाईचारा और सामुदायिक सहभागिता मजबूत होती है। श्रम उत्पादकता बढ़ने से कृषि, व्यवसाय और अन्य आजीविका गतिविधियों में बेहतर परिणाम मिलते हैं। स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च कम होने से परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है।
युवाओं ने लिया नशा छोड़ने का सार्वजनिक संकल्प
कार्यक्रम के दौरान ग्राम के युवा नीलेश साहू, अजय खांडेकर, देवदास खांडे एवं अनिकेत ध्रुव ने सार्वजनिक रूप से नशा छोड़ने का संकल्प लिया। उनके इस निर्णय की उपस्थित लोगों ने सराहना की और इसे अन्य युवाओं के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
स्वास्थ्य विभाग ने की मुख जांच
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुख जांच शिविर का भी आयोजन किया गया। जांच के माध्यम से तंबाकू सेवन से होने वाले प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कर लोगों को समय पर परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि तंबाकू छोड़ना केवल स्वयं के स्वास्थ्य की रक्षा करना नहीं, बल्कि परिवार और आने वाली पीढ़ियों को भी बीमारी, चिंता और आर्थिक बोझ से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सरपंच की रही सक्रिय भूमिका
इस अवसर पर ग्राम सरपंच अनिल जायसवाल की विशेष भूमिका रही। ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता और स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से तंबाकू मुक्त गांव के संकल्प को नई मजबूती मिली।
