कार्यस्थल की गरिमा हुई तार-तार, विरोध करने पर गला दबाकर जान लेने की कोशिश; पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार।
धरसींवा। शिक्षा के मंदिर में महिला शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा करने वाली घटना सामने आई है। ब्लॉक मुख्यालय धरसींवा के अंतर्गत ग्राम तरेसर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में पदस्थ प्रधान पाठक पर अपनी ही सहकर्मी महिला शिक्षिका से लगातार छेड़छाड़, अभद्र व्यवहार और विरोध करने पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगा है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रधान पाठक जय राम सेन (50), निवासी ग्राम पथरी, को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी पिछले कई महीनों से स्कूल में कार्यरत महिला शिक्षिका को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। वह आए दिन अभद्र टिप्पणियां करता, अश्लील इशारे करता और छेड़छाड़ कर शिक्षिका को परेशान करता था। कार्यस्थल का माहौल खराब न हो और सामाजिक बदनामी के डर से महिला अब तक चुप रही, लेकिन 24 जून की सुबह स्थिति उस समय भयावह हो गई जब आरोपी ने फिर से अशोभनीय हरकतें शुरू कर दीं।
बताया गया कि सुबह करीब 10 बजे स्कूल खुलने के बाद महिला शिक्षिका ने जब आरोपी की हरकतों का विरोध किया तो वह आगबबूला हो गया। आरोप है कि प्रधान पाठक ने शिक्षिका का गला दबाकर जान से मारने का प्रयास किया। महिला की चीख-पुकार सुनकर स्कूल में मौजूद अन्य शिक्षक मौके पर पहुंचे और किसी तरह उसे आरोपी के चंगुल से छुड़ाया। घटना के बाद पीड़िता ने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सिलयारी चौकी पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74, 115(2) एवं 351(3) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है।
चौकी प्रभारी सुशील वर्मा ने बताया कि महिला शिक्षिका की शिकायत मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गई। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। इस घटना ने एक बार फिर विद्यालयों में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
महिला सुरक्षा पर फिर बहस तेज
विद्यालय जैसे संवेदनशील परिसर में हुई इस घटना ने महिला शिक्षकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि स्कूलों में कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की शिकायतों के त्वरित निस्तारण, नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
