मुंगेली/ मुंगेली नगर पालिका क्षेत्र में सरकारी जमीनों पर कब्जा और अवैध निर्माण का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला लोरमी रोड तिराहा कब्रिस्तान के सामने शासकीय भूमि पर धड़ल्ले से हो रहे एक अवैध निर्माण का है, जहाँ रसूखदार द्वारा कानून को ठेंगा दिखाकर पक्का निर्माण खड़ा किया जा रहा हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले पर मुंगेली नगर पालिका प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है, जिससे अब शहर में ‘चढ़ावे के बड़े खेल’ की चर्चाएं जोरों पर हैं।
नोटिस – जवाब में का चल रहा खेल…
दिनांक 05/06/2026 को नगर पालिका ने मुंगेली के तिलक वार्ड निवासी अमित लाल को नोटिस जारी कर कहा कि आपके द्वारा नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 17 में बिना अनुमति लिए अवैध निर्माण किया गया हैं जो कि नगर पालिका अधिनियम 1961 का उल्लंघन हैं, साथ ही नगर पालिका ने अमित लाल को 3 दिनों का समय देते हुए भूमि का संपूर्ण दस्तावेज निकाय में जमा करने कहा गया। जिसके बाद अमित लाल ने 9 जून 2026 को विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
अमित लाल ने अपने जवाब में कहा कि नगर पालिका द्वारा जारी नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कथित अवैध निर्माण किस खसरा नंबर, भूमि के किस हिस्से और कितने क्षेत्रफल में किया गया है। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट विवरण के जारी नोटिस तथ्यात्मक रूप से अधूरा है। उन्होंने अपने जवाब में उल्लेख किया कि जिस भूमि पर दुकान निर्माण किया गया है, वह इंडियन क्रिश्चियन सोसायटी मिशनरीज ब्लाइंड स्कूल की संपत्ति है और शासकीय भूमि के अंतर्गत नहीं आती। अमित लाल के अनुसार उनके चाचा स्वर्गीय संजय दास ने लगभग 12 से 15 वर्ष पूर्व उक्त स्थान पर दुकान संचालन हेतु कच्चा निर्माण कराया था और लंबे समय से परिवार का कब्जा इस भूमि पर बना हुआ है।
स्थानीय नागरिकों को जब यह बता चला तो उनका और शिकायतकर्ताओं का कहना हैं कि अवैध निर्माणकर्ता का द्वारा दिया गया जवाब गोलमाल हैं, उनका कहना हैं नगर पालिका को भेजे गए गोलमोल जवाब से यह साफ कर दिया है कि निर्माण पूरी तरह से नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।जांच में देरी करना नगर पालिका की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाता हैं।
नगर पालिका क्यों बनी मूकदर्शक ?
मुंगेलीवासियों का कहना हैं कि शहर की सरकारी जमीनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी नगर पालिका व राजस्व विभाग से जुड़े अधिलारियों की होती है। आम जनता का कहना है कि अगर कोई गरीब अपनी झोपड़ी या मामूली दुकान भी सड़क किनारे रख ले, तो नगर पालिका का दस्ता तुरंत बुलडोजर लेकर पहुंच जाता है। लेकिन यहाँ शासकीय जमीन पर खुलेआम हो रहे अवैध निर्माण पर प्रशासन ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। इसमें बड़ा सवाल यह हैं कि क्या इस अवैध निर्माण को रसूखदारों और रक्षक ही भक्षक बने बैठे जिम्मेदारों का मूक संरक्षण प्राप्त है ?
जनता के बीच चर्चा ‘चढ़ावे’ का बड़ा खेल ?
प्रशासन की इस निष्क्रियता को देखकर अब आम जनता के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि इस मौन के पीछे ‘चढ़ावे’ का कोई बड़ा खेल चल रहा है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि आँखों के सामने शासकीय संपत्ति की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं और कार्रवाई के नाम पर केवल फाइलें दबाई जा रही हैं ? शासकीय जमीन पर किसी निजी व्यक्ति का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। मुंगेली कलेक्टर और उच्च अधिकारियों को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, ताकि सरकारी जमीन को भू-माफियाओं से मुक्त कराया जा सके और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। इस मामले में कलेक्टर जनदर्शन में पार्षद ने लिखित शिकायत भी की हैं।
