सिम्स मेडिकल कॉलेज बिलासपुर में पूर्ण की औपचारिकता, सामाजिक संगठनों ने सराहा निर्णय
मुंगेली । आज के दौर में जहां लोग अपने व्यक्तिगत जीवन और स्वार्थों तक सीमित होते जा रहे हैं, वहीं समाज में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने साहस, संवेदनशीलता और दूरदर्शिता से नई मिसाल कायम कर रहे हैं। ऐसे ही प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में सामने आए कुमार राज कश्यप, जिन्होंने देहदान का संकल्प लेकर समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।
Chhattisgarh Institute of Medical Sciences (सिम्स मेडिकल कॉलेज, बिलासपुर) पहुंचकर कुमार राज कश्यप ने अपने पुत्र Ashutosh Kashyap आशुतोष कश्यप एवं साथियों की उपस्थिति में देहदान की औपचारिक प्रक्रिया पूर्ण की। उनके इस निर्णय ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया और समाज के बीच एक सकारात्मक संदेश भी दिया।
कुमार राज कश्यप वर्तमान में मानवाधिकार सहायता संस्थान भारत Manavadhikar Sahayata Sansthan Bharat के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी, छत्तीसगढ़ अपाक्स कर्मचारी अधिकारी संगठन Chhattisgarh Apax Karmachari Adhikari Sangathan के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष तथा अखिल भारतीय कुर्मी महासभा Akhil Bharatiya Kurmi Mahasabha के प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में सामाजिक और संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। वे लंबे समय से सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहे हैं और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं।
इस अवसर पर सर्व कुर्मी समाज के जिलाध्यक्ष Shyam Murat Kaushik श्याम मुरत कौशिक, शिक्षक Abhyuday Julius अभ्युदय जुलियश, मानवाधिकार सहायता संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष Dharam Bhargav धरम भार्गव, Dr. Santosh Sahu डॉ. संतोष साहू सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने कुमार राज कश्यप के इस साहसिक और मानवीय निर्णय की सराहना की।
उपस्थित लोगों ने कहा कि आज के समय में देहदान जैसा निर्णय लेना अत्यंत साहस, संवेदना और त्याग का परिचायक है। यह केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है। मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में देहदान का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इससे मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को मानव शरीर की संरचना और चिकित्सा विज्ञान के व्यावहारिक अध्ययन में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों के अनुसार देहदान चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए अमूल्य योगदान है। इससे भविष्य के चिकित्सकों को बेहतर प्रशिक्षण मिलता है, जिसका लाभ अंततः पूरे समाज को प्राप्त होता है। कुमार राज कश्यप का यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का कार्य करेगा।
कुमार राज कश्यप के परिवार ने भी इस नेक कार्य में पूर्ण सहमति और समर्थन दिया है। उनकी धर्मपत्नी, जो अनुराग पब्लिक स्कूल Anurag Public School की संचालिका हैं, ने इस निर्णय में उनका पूरा साथ दिया। परिवार के सदस्यों ने इसे सेवा, त्याग और मानवता का सर्वोच्च रूप बताया।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि समाज में देहदान और अंगदान को लेकर अभी भी जागरूकता की आवश्यकता है। ऐसे प्रेरक निर्णय लोगों की सोच बदलने और सकारात्मक वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुमार राज कश्यप का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश देता है कि मानव जीवन केवल स्वयं तक सीमित नहीं है; मृत्यु के बाद भी शरीर समाज और मानवता की सेवा में उपयोगी बन सकता है।
