राज्य सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम को समकालीन और व्यवहारिक बनाने की पहल, आयोग ने ऑनलाइन सुझाव प्रक्रिया शुरू की; विशेषज्ञ समिति करेगी अंतिम निर्णय।
रायपुर । छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा (मेन्स) के पाठ्यक्रम में संशोधन की औपचारिक प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। आयोग ने इस बार पाठ्यक्रम को एकतरफा निर्धारित करने के बजाय अभ्यर्थियों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक समकालीन, पारदर्शी तथा प्रशासनिक सेवाओं की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना है।
आयोग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इच्छुक अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध विशेष ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए उम्मीदवारों को पहले आयोग के पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा। जिन अभ्यर्थियों का पूर्व से पंजीकरण है, वे अपने पुराने लॉगिन विवरण के माध्यम से सीधे सुझाव अनुभाग में जाकर अपनी राय प्रस्तुत कर सकते हैं। अधिसूचना जारी होने की तिथि से एक माह तक यह सुविधा उपलब्ध रहेगी। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद प्राप्त होने वाले सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा।
आयोग का मानना है कि बदलते प्रशासनिक परिदृश्य, तकनीकी विकास और सुशासन की नई अवधारणाओं को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम का समय-समय पर पुनरीक्षण आवश्यक है। इसी दृष्टिकोण से अभ्यर्थियों से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि वर्तमान पाठ्यक्रम के कौन-से विषय प्रासंगिक हैं, किन विषयों में संशोधन अपेक्षित है तथा किन नए आयामों को जोड़ा जाना चाहिए। प्राप्त सुझावों का परीक्षण विशेषज्ञ समिति द्वारा किया जाएगा, जिसके आधार पर संशोधित पाठ्यक्रम का अंतिम प्रारूप तैयार होगा।
शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का पाठ्यक्रम केवल परीक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह भावी प्रशासनिक अधिकारियों की बौद्धिक तैयारी का आधार भी बनता है। इसलिए पाठ्यक्रम में परिवर्तन करते समय राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की प्रवृत्तियों, राज्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं तथा समकालीन विषयों के संतुलित समावेश पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
वर्तमान परीक्षा व्यवस्था के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में सम्मिलित होना पड़ता है। मेन्स परीक्षा में सात अनिवार्य प्रश्नपत्र शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्नपत्र 200 अंकों का होता है तथा कुल लिखित परीक्षा 1400 अंकों की होती है। परीक्षा पूर्णतः वर्णनात्मक स्वरूप में आयोजित की जाती है, जिसमें भाषा, निबंध तथा सामान्य अध्ययन के विभिन्न आयामों—इतिहास, भूगोल, भारतीय संविधान, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, समाज और छत्तीसगढ़ से संबंधित विषयों – का मूल्यांकन किया जाता है।
हालांकि आयोग ने अभी संशोधित पाठ्यक्रम लागू करने की तिथि स्पष्ट नहीं की है, लेकिन शैक्षणिक विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी राज्य सेवा परीक्षा के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहले से वर्तमान पाठ्यक्रम के अनुसार तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में नए सिलेबस को तत्काल लागू करने के बजाय पर्याप्त संक्रमण अवधि देना अधिक व्यावहारिक होगा। संभावना व्यक्त की जा रही है कि सभी सुझावों के परीक्षण और अंतिम स्वीकृति के बाद संशोधित पाठ्यक्रम को आगामी परीक्षा चक्र से लागू किया जा सकता है, जिससे अभ्यर्थियों को नई रूपरेखा के अनुरूप तैयारी का पर्याप्त अवसर मिल सके।
