उरला फैक्ट्री विस्फोट के बाद सरकार सख्त, संचालन पर रोक; मुआवजे में कथित असमानता से नया विवाद

तीन श्रमिकों की मौत के बाद जांच तेज, सुरक्षा मानकों पर सवाल; परिजनों ने अलग-अलग मुआवजे के दावे पर उठाए प्रश्न।

रायपुर। राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित 3डी इनोवेशन फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए फैक्ट्री के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। हादसे में तीन श्रमिकों की जान जाने के बाद प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने और सुरक्षा मानकों की समीक्षा के बाद ही फैक्ट्री के भविष्य को लेकर निर्णय लिया जाएगा। इस बीच मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा के साथ मुआवजे की राशि को लेकर नया विवाद भी सामने आया है।

प्रारंभिक जांच के अनुसार फैक्ट्री में फेरो अलॉय उत्पादन इकाई के फर्नेस में लान्सिंग का कार्य चल रहा था। इसी दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर में अचानक विस्फोट हो गया। धमाका इतना तेज था कि उसकी आवाज आसपास के औद्योगिक क्षेत्र तक सुनाई दी। घटना के तुरंत बाद पुलिस, प्रशासन और दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं तथा राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। हालांकि तीन श्रमिकों की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार श्रमिकों की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री को तत्काल बंद कर दिया गया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार और फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है। इसी बीच पीड़ित परिवारों ने मुआवजे के वितरण को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि एक मृतक के परिवार को 30 लाख रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि मध्यप्रदेश निवासी दो अन्य मृतकों के परिवारों को 21-21 लाख रुपये देने की बात कही गई है। उनका कहना है कि जब दुर्घटना एक ही है और तीनों श्रमिक समान परिस्थितियों में जान गंवा चुके हैं, तो सहायता राशि में कथित अंतर क्यों रखा जा रहा है। हालांकि इस आरोप पर कंपनी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

हादसे के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का विशेष निरीक्षण कराया जाएगा, ताकि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। फिलहाल सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि दुर्घटना तकनीकी कारणों से हुई या सुरक्षा नियमों में लापरवाही इसकी वजह बनी। साथ ही मुआवजे को लेकर उठे विवाद पर भी प्रशासन और कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!