रायपुर में अवैध खैर लकड़ी का बड़ा भंडाफोड़,वन विभाग ने गोदाम सील कर दो ट्रक से अधिक माल किया जब्त

हरियाणा भेजी जानी थी खैर की खेप, पुराने वन अपराधों से जुड़े तार भी खंगाल रहा विभाग।

रायपुर । रायपुर में अवैध खैर लकड़ी के कारोबार के विरुद्ध छत्तीसगढ़ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक गोदाम पर छापेमारी की और दो ट्रक से अधिक खैर की लकड़ी जब्त की है। वन विभाग ने गोदाम को तत्काल सील कर दिया है तथा लकड़ी के स्रोत, परिवहन और इससे जुड़े तस्करी नेटवर्क की विस्तृत जांच प्रारंभ कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

वन विभाग के अनुसार, प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि जब्त की गई खैर की लकड़ी को हरियाणा भेजने की तैयारी थी। खैर की लकड़ी का उपयोग मुख्य रूप से कत्था बनाने में किया जाता है। कत्था पान उद्योग के अलावा अन्य उपयोगों के कारण देश के विभिन्न राज्यों में इसकी मांग बनी रहती है, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी उपयोगिता बताई जाती है। इसी कारण खैर की अवैध कटाई और तस्करी के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

यह कार्रवाई प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशन में संचालित विशेष अभियान के तहत की गई। संयुक्त दल में राज्य उड़नदस्ता के अनुविभागीय वन अधिकारी (एसडीओ) संदीप सिंह राजपूत, रायपुर वन परिक्षेत्र अधिकारी दीपक कुमार तिवारी तथा सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी संतोष सामंतराय राय सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। टीम ने गोदाम की तलाशी लेकर बड़ी मात्रा में लकड़ी जब्त की और परिसर को सील कर दिया।

वन विभाग ने बताया कि जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि लगभग पांच वर्ष पूर्व भी इसी मामले से जुड़े एक व्यक्ति के विरुद्ध अवैध खैर लकड़ी परिवहन का प्रकरण दर्ज हुआ था। उस समय एक ट्रक लकड़ी जब्त कर राजसात की कार्रवाई की गई थी तथा आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेजा गया था।

अधिकारियों के अनुसार, संबंधित व्यक्ति का नाम पूर्व में वन्यजीव अपराधों से जुड़े मामलों में भी सामने आ चुका है। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया संबंधित सक्षम प्राधिकारों के अधीन है।

वन विभाग का कहना है कि जब्त लकड़ी के वास्तविक स्रोत, परिवहन मार्ग, इसमें शामिल लोगों और संभावित तस्करी नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों के विरुद्ध वन अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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