अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितता पर चर्चा की मांग को लेकर कांग्रेस का जोरदार विरोध, अध्यक्ष ने मामला राज्य से असंबंधित बताते हुए प्रस्ताव किया निरस्त, दिनभर के लिए स्थगित हुई कार्यवाही।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार को तीखी राजनीतिक नोकझोंक के साथ शुरू हुआ। सत्र के पहले ही दिन अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और अनियमितता के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। कांग्रेस ने इस विषय पर सदन में चर्चा कराने के लिए कार्य स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने राज्य से असंबंधित विषय बताते हुए अस्वीकार कर दिया। इसके बाद विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया, जिसके चलते अंततः सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित करनी पड़ी।
शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कार्य स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा से अर्पित किए गए चढ़ावे के साथ कथित रूप से धोखा हुआ है। उनका कहना था कि देशभर के लोगों, जिनमें छत्तीसगढ़ के श्रद्धालु भी शामिल हैं, ने मंदिर निर्माण और चढ़ावे में योगदान दिया है, इसलिए इस विषय पर सदन में चर्चा होना आवश्यक है। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि वर्ष 2024 में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर विधानसभा ने सर्वसम्मति से आभार प्रस्ताव पारित किया था।
विपक्ष की मांग पर वरिष्ठ भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह विषय छत्तीसगढ़ विधानसभा के अधिकार क्षेत्र का नहीं है। उन्होंने कहा कि आस्था का सम्मान सभी करते हैं, किंतु दूसरे राज्य से जुड़े मामले पर इस सदन में चर्चा उचित नहीं है।
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के चढ़ावे में लूट हुई है और इस गंभीर विषय पर सरकार को चर्चा से नहीं बचना चाहिए। इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों पक्षों के सदस्य नारेबाजी करने लगे।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने स्पष्ट किया कि प्राप्त सभी स्थगन प्रस्तावों का परीक्षण किया गया है, किंतु मामला छत्तीसगढ़ से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित नहीं होने के कारण प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता। अध्यक्ष के निर्णय के बावजूद कांग्रेस विधायक अपनी मांग पर अड़े रहे। पहले सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित की गई। दोबारा बैठक शुरू होने पर भी विपक्ष ने पोस्टर प्रदर्शन और नारेबाजी जारी रखी। लगातार जारी गतिरोध के बीच अध्यक्ष ने दिनभर के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा कर दी। इससे मानसून सत्र का पहला दिन किसी विधायी कार्य के बजाय राजनीतिक टकराव और हंगामे के नाम रहा।
