जलभराव से बढ़ा हादसों का खतरा, ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित, विकास के दावों पर उठने लगे सवाल
मुंगेली। सावन की लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर मुंगेली जिले की जर्जर सड़क व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी है। नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक अधिकांश सड़कें बड़े-बड़े गड्ढों और जलभराव की चपेट में हैं। कई स्थानों पर सड़क और गड्ढे में फर्क कर पाना मुश्किल हो गया है। बारिश का पानी गड्ढों में भर जाने से सड़कें किसी तालाब या तरणताल जैसी दिखाई दे रही हैं, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हालत ऐसे हैं कि लोगों को लगता है मानो विकास की रफ्तार थम गई हो और जिले की सड़कें दशकों पुराने दौर की तस्वीर बयां कर रही हों।
जिले को बिलासपुर, रायपुर, कवर्धा, लोरमी तथा अन्य प्रमुख शहरों से जोड़ने वाले मार्गों पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं। इन गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। विशेषकर रात के समय और तेज बारिश के दौरान इन मार्गों पर सफर करना जोखिम भरा साबित हो रहा है। दोपहिया वाहन चालक फिसलकर चोटिल हो रहे हैं, वहीं कार, ऑटो और अन्य छोटे-बड़े वाहन भी गड्ढों में उछलते नजर आते हैं। कई वाहन चालकों को अपने वाहनों में तकनीकी खराबी और आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा है।
नगर के भीतर भी स्थिति कम गंभीर नहीं है। मुख्य मार्गों के अलावा कई कॉलोनियों और वार्डों की सड़कें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। जगह-जगह जलभराव होने से पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। राहगीरों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जबकि दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि खराब सड़कों और पानी भरने के कारण ग्राहकों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर और भी चिंताजनक बताई जा रही है। गांवों को मुख्यालय से जोड़ने वाली डब्ल्यूबीएम सड़कों पर कीचड़ का साम्राज्य है, जबकि पक्की सड़कों पर बने गड्ढों में खेतों का पानी भर जाने से कई मार्गों पर आवागमन बाधित हो रहा है। कई गांवों के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मुख्यालय पहुंचने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। सबसे अधिक कठिनाई स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को हो रही है। कई स्थानों पर एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में सड़कें बदहाल हो जाती हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी पहल नहीं हो पाती। बारिश शुरू होने के बाद केवल अस्थायी मरम्मत या पैचवर्क किया जाता है, जो कुछ ही दिनों में फिर उखड़ जाता है। लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा, जिसके कारण करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कें लंबे समय तक टिक नहीं पातीं।
मुंगेली जिला प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जिले से उपमुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू तथा पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले जैसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधि जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद सड़कों की बदहाल स्थिति आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। नागरिकों का कहना है कि जिले को प्रदेश स्तर पर मजबूत राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने के बाद भी यदि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा बेहतर नहीं हो पा रही है, तो यह चिंता का विषय है।
गौरतलब है कि पूर्व में लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश को गड्ढा मुक्त बनाने का दावा किया था, लेकिन मुंगेली जिले की वर्तमान सड़कें उन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही हैं। लगातार हो रही बारिश के बीच जर्जर सड़कों की समय पर मरम्मत नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। नागरिकों ने प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि बारिश के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए तत्काल गड्ढों की मरम्मत कराई जाए तथा क्षतिग्रस्त सड़कों के स्थायी सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
