पंडरिया के डॉ. प्रशांत शुक्ला को राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक29 नक्सलियों को ढेर करने वाली ऐतिहासिक मुठभेड़ में निभाई थी अहम भूमिका, मुंगेली में ASP के पद पर हैं पदस्थ

पंडरिया के डॉ. प्रशांत शुक्ला को राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक

29 नक्सलियों को ढेर करने वाली ऐतिहासिक मुठभेड़ में निभाई थी अहम भूमिका, मुंगेली में ASP के पद पर हैं पदस्थ

पंडरिया। पंडरिया की माटी में पले-बढ़े डॉ. प्रशांत शुक्ला ने अपने अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और कुशल नेतृत्व से न केवल पुलिस विभाग, बल्कि पंडरिया और पूरे कबीरधाम क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। कांकेर जिले के छोटे बेटिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत कलपर-हिल्दूर के जंगलों में 16 अप्रैल 2024 को हुई ऐतिहासिक नक्सल मुठभेड़ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए डॉ. प्रशांत शुक्ला को राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया गया है। इस मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 29 नक्सलियों को ढेर किया था।

पंडरिया में हुई प्रारंभिक शिक्षा

डॉ. प्रशांत शुक्ला पंडरिया के प्रतिष्ठित वैद्य गिरजा कुमार शुक्ला के पुत्र हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक एवं स्कूली शिक्षा पंडरिया के शासकीय विद्यालयों से प्राप्त की और कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई यहीं पूरी की। इसके बाद उन्होंने वेटेरिनरी कॉलेज जबलपुर से उच्च शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से प्रशासनिक एवं पुलिस सेवा में प्रवेश का सफर शुरू किया।

वाणिज्यिक कर निरीक्षक से शुरू हुआ सफर

डॉ. प्रशांत शुक्ला का चयन छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के माध्यम से सर्वप्रथम वाणिज्यिक कर निरीक्षक के पद पर हुआ। वर्ष 2005 से 2013 तक उन्होंने वाणिज्यिक कर विभाग में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वर्ष 2008 की PSC परीक्षा का परिणाम वर्ष 2013 में आने के बाद उनका चयन पुलिस उप अधीक्षक (DSP) के पद पर हुआ। इस तरह उन्होंने पुलिस सेवा में प्रवेश कर कानून-व्यवस्था और नक्सल विरोधी अभियानों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी शुरू की।

नक्सल प्रभावित इलाकों में निभाई जिम्मेदारी

राज्य पुलिस अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद डॉ. शुक्ला की शुरुआती पदस्थापनाओं में गरियाबंद तथा बीजापुर के दुर्गम एवं नक्सल प्रभावित कुटरू क्षेत्र में एसडीओपी के रूप में जिम्मेदारी शामिल रही। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हुए उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और नक्सल विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई।

इसके बाद उन्होंने सीएसपी राजनांदगांव, एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) तथा सीआईडी (CID) में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। अलग-अलग विभागों में कार्य करने के दौरान उनके प्रशासनिक अनुभव और पुलिसिंग क्षमता में निरंतर वृद्धि हुई।

ASP बनने के बाद नक्सल अभियान में अहम भूमिका

वर्ष 2021 में डॉ. प्रशांत शुक्ला को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के पद पर पदोन्नति मिली। जुलाई 2023 में उन्हें कांकेर जिले के पखांजूर में ASP के रूप में पदस्थ किया गया। कांकेर का क्षेत्र लंबे समय से नक्सल गतिविधियों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता रहा है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में पदस्थ रहते हुए उन्होंने सुरक्षा बलों के साथ समन्वय और नक्सल विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसी कार्यकाल के दौरान 16 अप्रैल 2024 को छोटे बेटिया थाना क्षेत्र के कलपर-हिल्दूर के जंगलों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच बड़ी मुठभेड़ हुई। इस अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली और 29 नक्सली मारे गए। इस महत्वपूर्ण अभियान में डॉ. प्रशांत शुक्ला की भूमिका और नेतृत्व को देखते हुए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक के लिए सम्मानित किया गया।

वर्तमान में मुंगेली जिले में ASP

डॉ. प्रशांत शुक्ला वर्तमान में मुंगेली जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी कार्यशैली, कर्तव्य के प्रति समर्पण और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नेतृत्व क्षमता ने पुलिस विभाग में उन्हें अलग पहचान दिलाई है।

पंडरिया और कबीरधाम में गर्व का माहौल

डॉ. प्रशांत शुक्ला को राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक मिलने की खबर से पंडरिया सहित पूरे कबीरधाम जिले में हर्ष और गर्व का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पंडरिया की धरती से निकले एक पुलिस अधिकारी ने अपने साहस और कर्तव्यनिष्ठा से क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनकी उपलब्धि युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी मानी जा रही है।

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