धनवार। मानवाधिकार आपके द्वार कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को पीएम श्री मध्य विद्यालय, धनवार में साइबर डिजिटल सुरक्षा एवं मानवाधिकार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को साइबर अपराध से बचाव, डिजिटल सुरक्षा, बैंकिंग सुरक्षा, मानवाधिकार तथा विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना था।कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के बच्चों द्वारा अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं सम्मान करने के साथ हुई। बच्चों ने उत्साहपूर्वक अतिथियों का अभिनंदन किया, जिससे कार्यक्रम का माहौल प्रेरणादायक और सौहार्दपूर्ण बन गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गिरिडीह के लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम) अमित कुमार चौधरी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक आज शिक्षा, बैंकिंग और दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। इसके साथ साइबर अपराध का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड अथवा बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सतर्कता बड़ी आर्थिक हानि से बचा सकती है।विशिष्ट अतिथि अरबिंद कुमार, पैरालीगल वॉलंटियर (पीएलवी) ने मानवाधिकारों एवं विधिक सहायता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के साथ-साथ दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने की सीख दी तथा किसी भी प्रकार के शोषण या अधिकारों के हनन की स्थिति में उचित माध्यम से शिकायत करने की अपील की।मीडिया ऑफिसर विष्णु बजरंगी ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर बल देते हुए विद्यार्थियों को फर्जी लिंक, संदिग्ध कॉल, ऑनलाइन ऑफर और अनजान लोगों से होने वाली डिजिटल बातचीत से सावधान रहने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 एवं सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की जानकारी देते हुए कहा कि जागरूक नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा अधिक प्रभावी ढंग से कर सकते हैं।मीडिया ऑफिसर पवन कुमार बरनवाल ने कहा कि साइबर अपराधी लोगों को लालच, डर और झूठे विश्वास में लेकर ठगी करते हैं। इसलिए किसी भी संदिग्ध संदेश, लिंक या कॉल पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।सीएफएल इंचार्ज गौतम कुमार एवं ट्रेनर बबन कुमार राय ने विद्यार्थियों को मजबूत पासवर्ड बनाने, दो-स्तरीय सुरक्षा (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) अपनाने, संदिग्ध मोबाइल एप और लिंक से बचने तथा सोशल मीडिया खातों की गोपनीयता सुरक्षित रखने की जानकारी दी।विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरबिंद कुमार पाण्डेय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को पुस्तक ज्ञान के साथ व्यवहारिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्रदान करते हैं।

SADAR कार्यक्रम में उषा बरनवाल, शंकर रविदास, विकास संथालिया, बसंत भारती, महेश प्रसाद, प्रदीप कुमार, कामदेव राय एवं टिंकू विश्वकर्मा समेत विद्यालय के कई शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान आयोजित क्विज प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। साइबर सुरक्षा, डिजिटल जागरूकता एवं मानवाधिकार से संबंधित प्रश्नों के सही उत्तर देने वाले विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। अंत में आयोजकों ने कहा कि मानवाधिकार आपके द्वार अभियान के तहत आगे भी विद्यालयों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि समाज में सुरक्षित डिजिटल वातावरण, विधिक जागरूकता और मानवाधिकारों के प्रति व्यापक जनचेतना विकसित की जा सके।
