छत्तीसगढ़ का प्रथम पारंपरिक हरेली त्यौहार गेड़ी नागर हल से पर्व बड़ी हरसुल्लास से मनाया गया

कृषि यंत्रों की पूजा और धान के खेतों में दिखी खुशहाली की झलक, बच्चे-बूढ़े और महिलाओं में रहा उत्साह

जांजगीर-चांपा। ब्लॉक नवागढ़ छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा और कृषि संस्कृति से जुड़ा पारंपरिक पर्व बड़ी इस वर्ष भी पूरे हर्षोल्लास और उमंग के साथ मनाया गया। पर्व को लेकर गांवों में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल रहा। बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और किसान सभी इस पारंपरिक पर्व की खुशियों में शामिल हुए।

धान की लहलहाती फसलों के बीच किसानों ने अपने कृषि उपकरणों की साफ-सफाई कर उनकी पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर नागर सहित पारंपरिक कृषि यंत्रों की विशेष पूजा की गई। नागर वही पारंपरिक हल है, जिसका उपयोग हमारे पूर्वज खेतों की जुताई और बुवाई के लिए करते आए हैं।

बड़ी पर्व केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, मेहनतकश किसान और हमारी पुरखों की परंपराओं से जुड़ी जीवंत विरासत है। आधुनिक कृषि उपकरणों के दौर में भी इस पर्व के माध्यम से पारंपरिक कृषि पद्धतियों और पूर्वजों की स्मृतियों को जीवित रखने का प्रयास किया जाता है।

अगस्त माह में मनाए जाने वाले इस पारंपरिक पर्व के दौरान गांवों में आपसी मेल-जोल, भाईचारे और खुशियों का वातावरण देखने को मिला। किसानों ने अच्छी फसल, परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

बड़ी पर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान उसकी मिट्टी, खेती-किसानी, लोकपरंपरा और गांवों की संस्कृति में बसती है।

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