पी के शेर्पा
बहुत से लोग मुझे प्रकृति संरक्षण अभियंता, पर्वतीय पर्यटनकर्मी और पर्यटन विशेषज्ञ के रूप में जानते हैं। मेरी समझ में पर्यटन केवल घूमना-फिरना, होटल और आर्थिक कारोबार तक सीमित नहीं है। पर्यटन प्रकृति, संस्कृति, कृषि, जल, हिमालय और लोगों को दुनिया से जोड़ने का एक शक्तिशाली माध्यम है।नेपाल पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत संभावनाशील देश है। हमारे पास विश्व की सर्वोच्च चोटी सगरमाथा (माउंट एवरेस्ट), हिमालय और पहाड़, जैव विविधता, हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति, धार्मिक धरोहर, सुंदर गांव और दुनिया को आकर्षित करने वाली मौलिक कृषि प्रणालियां हैं। इन सभी धरोहरों को अलग-अलग देखने के बजाय इन्हें नेपाल की समग्र पर्यटन पहचान के रूप में विश्व से जोड़ना चाहिए—यह मेरा दृढ़ विश्वास है।कृषि पर्यटन : किसान, गांव और दुनिया के बीच संबंधनेपाल की वास्तविक सुंदरता उसके गांवों में भी बसती है। खेत-खलिहान, जैविक खेती, स्थानीय उत्पाद, फल-फूल, जड़ी-बूटियां, पशुपालन और मौलिक खान-पान को पर्यटन से जोड़ा जा सकता है।यदि विदेशी और देश के पर्यटकों को गांव के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का अवसर दिया जाए, तो इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है।मेरी दृष्टि में कृषि पर्यटन का अर्थ केवल पर्यटकों को खेत दिखाना नहीं है, बल्कि किसान के श्रम और नेपाल की मौलिक जीवनशैली को दुनिया से जोड़ना है।जल पर्यटन : जल संरक्षण से जुड़ा पर्यटनमैं हमेशा कहता हूं—«“जहां बर्फ है, वहां पानी है; जहां पानी है, वहां जीवन है।”»यह केवल मेरा नारा नहीं, बल्कि नेपाल के पर्यटन और प्रकृति संरक्षण का गहरा संदेश भी है। हिमालय की बर्फ से नदियां बनती हैं, नदियों से जीवन चलता है, कृषि चलती है और पर्यटन का भविष्य भी जुड़ा हुआ है।नेपाल में राफ्टिंग, कायाकिंग, नौकायन, झील पर्यटन, नदी किनारे पर्यटन तथा अन्य जल आधारित पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन जल पर्यटन के विकास के साथ जल स्रोतों और नदियों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देनी होगी।दुनिया को नेपाल के जल संसाधनों और नदियों की सुंदरता दिखाते हुए उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।साहसिक एवं पर्वतीय पर्यटन : नेपाल की वैश्विक पहचाननेपाल को दुनिया विशेष रूप से हिमालय और साहसिक पर्यटन के कारण पहचानती है। पर्वतारोहण, ट्रेकिंग, स्कीइंग, रॉक क्लाइम्बिंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों ने नेपाल को विश्व के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में विशेष स्थान दिलाया है।लेकिन मेरे अनुभव ने मुझे एक महत्वपूर्ण बात सिखाई है—«हिमालय ने हमें केवल आय का अवसर नहीं दिया, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी दी है।»इसलिए पर्वतीय पर्यटन को कचरा प्रबंधन, हिमालय संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता और स्थानीय समुदाय के हितों से जोड़ना आवश्यक है। पर्यटन विकास के नाम पर प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।संस्कृति, धर्म और मौलिकता का पर्यटननेपाल की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता में है। यहां की विभिन्न जातियां, भाषाएं, संस्कृतियां, वेशभूषाएं, लोककलाएं, पर्व-त्योहार और धार्मिक धरोहरें दुनिया भर के लोगों को आकर्षित करने की क्षमता रखती हैं।पर्यटक नेपाल में केवल प्राकृतिक दृश्य देखने न आएं, बल्कि नेपाल की आत्मा को अनुभव करने का अवसर भी उन्हें मिले।गांव में ठहरना, स्थानीय भोजन का स्वाद लेना, स्थानीय संस्कृति को समझना और समुदाय के साथ जुड़ना—ऐसा पर्यटन नेपाल और दुनिया के बीच और अधिक मजबूत संबंध स्थापित कर सकता है।पर्यटन के साथ प्रकृति संरक्षणमैं चार दशकों से अधिक समय से प्रकृति संरक्षण के संदेश से जुड़कर कार्य करता आ रहा हूं। इसलिए पर्यटन को लेकर मेरी दृष्टि हमेशा संरक्षण आधारित और जिम्मेदार पर्यटन पर केंद्रित रही है।मेरा विश्वास है—प्रकृति रहेगी तो पर्यटन रहेगा।पानी रहेगा तो जीवन रहेगा।संस्कृति रहेगी तो पहचान रहेगी।और ये सब रहेंगे तो नेपाल दुनिया से जुड़ा रहेगा।इसलिए पर्यटन विकास की प्रत्येक गतिविधि में शून्य कचरा की सोच, वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।दुनिया से जोड़ने की मेरी पर्यटन दृष्टिपर्यटन विशेषज्ञ के रूप में मेरा उद्देश्य केवल नेपाल के किसी एक पर्यटन स्थल का प्रचार करना नहीं है। मेरा मानना है कि नेपाल के हिमालय, कृषि, जल, संस्कृति, साहसिक अनुभव और प्रकृति संरक्षण को एक ही संदेश में जोड़कर पूरी दुनिया तक पहुंचाया जाना चाहिए।मेरी पर्यटन दृष्टि है—कृषि के माध्यम से गांवों को दुनिया से जोड़ें,जल के माध्यम से जीवन के महत्व को समझाएं,हिमालय के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का संदेश दें,संस्कृति के माध्यम से मानवता को जोड़ें,और जिम्मेदार पर्यटन के माध्यम से नेपाल को विश्व से जोड़ें।नेपाल में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। अब हमें पर्यटन को केवल आर्थिक क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र की पहचान, प्रकृति संरक्षण, संस्कृति संरक्षण और विश्व के साथ मित्रता का माध्यम बनाकर विकसित करना होगा।«“मेरा सपना केवल अधिक से अधिक पर्यटकों को नेपाल लाना नहीं है, बल्कि नेपाल आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को नेपाल की प्रकृति, संस्कृति और संरक्षण का संदेश लेकर दुनिया में लौटने की प्रेरणा देना है।”»— पीके शेर्पापर्यटन विशेषज्ञ एवं प्रकृति संरक्षण अभियंता
