सबसे कम उम्र में बेटे को सगरमाथा शिखर तक पहुंचाकर विश्व कीर्तिमान बनाने वाले कीर्तिमानी पर्वतारोही ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेशकाठमांडू/नेपाल। सबसे कम उम्र में अपने बेटे को सगरमाथा (माउंट एवरेस्ट) के शिखर तक पहुंचाकर विश्व कीर्तिमान बनाने वाले तथा पिता-पुत्र के रूप में एक साथ सगरमाथा के शिखर पर सफलतापूर्वक आरोहण करने वाले कीर्तिमानी पर्वतारोही एवं लंबे समय से पर्वतीय क्षेत्र से जुड़े पीके शेर्पा (पीके शेर्पा क्लाइमेट कैंपेनर) ने हिमालय संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण और सकारात्मक संदेश दिया।सगरमाथा सहित हिमालयी क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रहे पीके शेर्पा ने कहा कि हिमालय पर चढ़ना ही केवल कीर्तिमान नहीं है, बल्कि हिमालय की स्वच्छता और संरक्षण करना भी हमारी वास्तविक जिम्मेदारी है।उन्होंने हिमालय में बढ़ते अव्यवस्थित कचरे, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि हिमालय केवल पर्वतारोहियों के लिए साहस और उपलब्धि का प्रतीक नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए जीवन का महत्वपूर्ण आधार है।उन्होंने कहा कि हिमालय स्वच्छ और सुरक्षित रहेगा, तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित रह सकेगा। इसलिए पर्वतारोहण के साथ-साथ हिमालय की सफाई, कचरा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता को भी प्राथमिकता देना आवश्यक है।पीके शेर्पा का यह सकारात्मक संदेश दारी गैंग – नेपाली बियर्ड लवर्स की बैठक के दौरान साझा किया गया, जहां उन्होंने अपने पर्वतारोहण अनुभवों के साथ-साथ हिमालय और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अपने विचार रखे।उनका संदेश स्पष्ट है कि आज आवश्यकता केवल नए कीर्तिमान बनाने की नहीं, बल्कि उन प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने की भी है, जिनकी वजह से नेपाल और हिमालय को पूरी दुनिया में विशेष पहचान मिली है।“हिमाल चढ़्नु मात्र कीर्तिमान होइन, हिमालको सरसफाइ र संरक्षण गर्नु पनि हाम्रो वास्तविक दायित्व हो। हिमाल सफा रहे मात्र हाम्रो भविष्य सुरक्षित रहन्छ।”अर्थात्—“हिमालय पर चढ़ना मात्र कीर्तिमान नहीं है, हिमालय की स्वच्छता और संरक्षण करना भी हमारा वास्तविक दायित्व है। हिमालय स्वच्छ रहेगा, तभी हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा।”
