रिकॉर्ड गिनीज़ की किताब में नहीं, इंसान की चेतना में— पीके शेर्पा की चार दशक से अधिक लंबी प्रकृति संरक्षण यात्रा

“प्रकृति बचाएँ, जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के तापमान को कम करें।”“पी के शेर्पा का रिकॉर्ड गिनीज़ की किताब में नहीं, बल्कि लोगों की चेतना में है।

”प्रकृति संरक्षण अभियंता पीके शेर्पा की चार दशक से अधिक लंबी यात्रा किसी कीर्तिमान, पदक, सम्मान या व्यक्तिगत प्रसिद्धि के लिए शुरू नहीं हुई थी। बचपन से ही उनका प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव रहा। हिमालय, बर्फ, पानी, जंगल, मिट्टी, हवा और संपूर्ण जीव-जगत के प्रति उन्होंने जो आत्मीय संबंध महसूस किया, वह धीरे-धीरे उनके जीवन का उद्देश्य बन गया। वर्ष 2040 से प्रकृति बचाने की चेतना लेकर निरंतर यात्रा पर निकले पीके शेर्पा का अभियान केवल प्रकृति संरक्षण तक सीमित नहीं है। उनकी यात्रा प्रकृति से सीखने, उसका संदेश मानव समाज तक पहुँचाने और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक प्रकृति के प्रति चेतना हस्तांतरित करने की यात्रा है।पंचतत्व से जुड़ा प्रकृति दर्शनपीके शेर्पा की प्रकृति संरक्षण यात्रा में पंचतत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश— का विशेष महत्व है।पृथ्वी हमें आधार और अन्न देती है। जल जीवन को निरंतरता प्रदान करता है। अग्नि ऊर्जा और शक्ति देती है। वायु प्रत्येक जीव को जीवन की सांस देती है। आकाश संपूर्ण सृष्टि को अपनी विशाल गोद में समेटे हुए है।उनके प्रकृति दर्शन के अनुसार इन पाँच तत्वों में से किसी एक का संतुलन बिगड़ने पर पूरी प्रकृति प्रभावित होती है। इसलिए प्रकृति संरक्षण का अर्थ केवल जंगल बचाना या पौधे लगाना ही नहीं है; बल्कि पंचतत्वों के बीच के संतुलन को समझना और उनका सम्मान करना भी है।उनका संदेश स्पष्ट है—“पंचतत्वों का सम्मान करें, प्रकृति का संतुलन बचाएँ और जीवन का भविष्य सुरक्षित करें।”विश्व के सौ से अधिक देशों के साथियों के साथ एक पृथ्वी के लिएपीके शेर्पा का विश्वास है—“प्रकृति का कोई देश नहीं होता। हवा सीमाओं को नहीं पहचानती। पानी पासपोर्ट नहीं पूछता। जलवायु परिवर्तन अमीर-गरीब, बड़े-छोटे देशों को अलग करके प्रभावित नहीं करता।”इसी सोच के साथ उन्हें विश्व के सौ से अधिक देशों के साथियों के साथ वृक्षारोपण करते हुए प्रकृति संरक्षण का साझा संदेश फैलाने का अवसर मिला।अलग-अलग भाषा, संस्कृति और भूगोल के लोग जब एक ही पौधे के आसपास खड़े हुए, तब उन्होंने एक बड़ी सच्चाई महसूस की—“हम अलग-अलग देशों के हो सकते हैं, लेकिन हमारी पृथ्वी एक ही है।”उनके लिए एक पौधा लगाना केवल मिट्टी में पौधा रोपना नहीं है। यह भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता है। यह स्वच्छ हवा, पानी, हरियाली और सुरक्षित पृथ्वी को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का संकल्प है।प्रकृति रूपांतरण, हस्तांतरण और पीढ़ी हस्तांतरणपीके शेर्पा के प्रकृति अभियान की एक महत्वपूर्ण सोच तीन शब्दों में समाहित है—प्रकृति रूपांतरण।प्रकृति हस्तांतरण।प्रकृति पीढ़ी हस्तांतरण।प्रकृति रूपांतरण का अर्थ है मनुष्य की सोच में परिवर्तन। प्रकृति को केवल उपयोग की वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के आधार के रूप में समझना चाहिए। विनाश से संरक्षण की ओर, प्रदूषण से स्वच्छता की ओर और स्वार्थ से जिम्मेदारी की ओर जाने वाली चेतना का परिवर्तन ही प्रकृति रूपांतरण है।प्रकृति हस्तांतरण का अर्थ है कि आज हमें प्राप्त जंगल, बर्फ, पानी, स्वच्छ हवा और जैव-विविधता को हमेशा के लिए केवल अपनी संपत्ति न समझें, बल्कि उनका संरक्षण करके अगली पीढ़ी को सुरक्षित रूप से सौंपें।पीके शेर्पा का विश्वास है—“भावी पीढ़ी को घर, सड़क और संपत्ति ही नहीं, बल्कि रहने योग्य पृथ्वी भी छोड़कर जाना चाहिए।”प्रकृति पीढ़ी हस्तांतरण का अर्थ है प्रकृति के प्रति प्रेम और संरक्षण की चेतना को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाना—माता-पिता से बच्चों तक, शिक्षक से विद्यार्थियों तक, समाज से युवाओं तक और आज की पीढ़ी से आने वाली पीढ़ी तक।उनके अभियान का मूल विश्वास है—“आज प्रकृति बचाएँ, कल की पीढ़ी को जीवन दें।”विद्यार्थियों के पाठ तक पहुँची प्रकृति की यात्रापीके शेर्पा की प्रकृति संरक्षण यात्रा केवल व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित न रहे, इसी सोच के साथ उनके जीवन और यात्रा के कुछ पहलू विद्यार्थी पीढ़ी तक भी पहुँचे हैं।नेपाली श्रृंखला की कक्षा 7 में उनकी जीवनी को शामिल किया गया है, जहाँ विद्यार्थी उनके प्रकृति प्रेम, जीवन संघर्ष और संरक्षण यात्रा के बारे में पढ़ते हैं। इसी प्रकार नेपाल सरकार की कक्षा 12 की शैक्षिक सामग्री में कीर्तिमान से संबंधित प्रसंग में भी उनकी उपलब्धियों और यात्रा से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है।उनके लिए सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब कोई विद्यार्थी उनके जीवन के बारे में पढ़कर प्रकृति से प्रेम करना सीखता है।उनका विश्वास है—यदि उनकी जीवनी पढ़कर कोई एक विद्यार्थी पौधा लगाता है, पानी बचाता है, हिमालय और जंगल के महत्व को समझता है या जलवायु परिवर्तन के प्रति अपनी जिम्मेदारी महसूस करता है, तो यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।दस बार जीवन के कठिन मोड़ से लौटने वाली यात्राचार दशक से अधिक लंबी इस यात्रा में हमेशा फूलों की राह नहीं थी। इसमें अनगिनत उतार-चढ़ाव, संघर्ष, पीड़ा और चुनौतियाँ भी शामिल थीं।प्रकृति की गोद में चलते हुए, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में यात्रा करते हुए और अभियान को निरंतर आगे बढ़ाते हुए दस बार तक उनका जीवन अत्यंत गंभीर संकट में पहुँचा। यह अनुभव भी उनके जीवन का हिस्सा बन गया।लेकिन हर कठिन मोड़ उन्हें रोक नहीं सका। बल्कि हर बार उनके भीतर एक भावना और मजबूत होती गई—“अभी प्रकृति के लिए कुछ काम बाकी है।”इसीलिए वे फिर उठे, फिर चले और फिर दुनिया को याद दिलाने का प्रयास किया—“प्रकृति बचेगी, तभी मानवता बचेगी।”जब प्रकृति ने पीके शेर्पा को अपनी गोद में बुलायापीके शेर्पा के जीवन में कुछ ऐसे क्षण भी आए हैं, जिन्हें शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना कठिन है।हिमालय की विशालता, जंगल की गहराई, बर्फ की निस्तब्धता, नदी की आवाज और प्रकृति की अपार शक्ति के बीच वे कभी-कभी इतनी गहराई से डूब गए कि उन्हें ऐसा अनुभव हुआ मानो प्रकृति स्वयं उन्हें अपने संसार में ले जा रही हो।प्रकृति की विशाल गोद में स्वयं को पूरी तरह खो देने का अनुभव करते हुए वे कई बार भावुक हुए हैं। ऐसे क्षणों में उनके मन में प्रकृति से मिले संदेश को मानव समाज तक पहुँचाने की तीव्र इच्छा जागी।उनके लिए प्रकृति की गोद में खो जाना मानव समाज से दूर जाना नहीं है। बल्कि प्रकृति से मिली गहरी अनुभूति और सत्य को लेकर मानव समाज में वापस लौटने की यात्रा है।इसीलिए पीके शेर्पा की प्रकृति संरक्षण यात्रा वास्तव में—“प्रकृति की गोद से मानव चेतना तक की यात्रा है।”जहाँ बर्फ, वहाँ पानी; जहाँ पानी, वहाँ जीवनपीके शेर्पा के प्रकृति अभियान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संदेश है—“जहाँ बर्फ, वहाँ पानी; जहाँ पानी, वहाँ जीवन।”बर्फ का सुरक्षित रहना केवल हिमालय की सुंदरता को बचाना नहीं है। बर्फ के साथ पानी जुड़ा है। पानी के साथ कृषि, जंगल, जीव-जंतु और मानव जीवन जुड़े हैं।इसलिए बर्फ के पिघलने की समस्या केवल हिमालय की समस्या नहीं है—यह पूरी मानवता के भविष्य का प्रश्न है।उनका संदेश हमेशा यही रहा है—“प्रकृति बचाएँ, जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के तापमान को कम करें।”गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड न लेना कोई असमंजस का विषय नहींपीके शेर्पा के जीवन और यात्रा के बारे में कई लोग एक प्रश्न करते हैं—“इतनी चुनौतीपूर्ण यात्राएँ और उपलब्धियाँ होने के बावजूद पीके शेर्पा ने गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड क्यों नहीं लिया?”कुछ लोगों के लिए यह विषय जिज्ञासा या असमंजस का कारण हो सकता है। लेकिन पीके शेर्पा का निर्णय स्पष्ट है—गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड न लेना किसी उपलब्धि के अभाव का कारण नहीं है।उनके जीवन का उद्देश्य कभी केवल किसी प्रमाणपत्र पर अपना नाम दर्ज कराना नहीं रहा।कीर्तिमान का एक आँकड़ा आज होता है, कल कोई दूसरा व्यक्ति उसे तोड़ सकता है। कोई प्रमाणपत्र समय के साथ पुराना हो सकता है। किताब के किसी पन्ने पर लिखा नाम बदल सकता है।लेकिन यदि—एक बच्चे के मन में प्रकृति के प्रति प्रेम जागे,एक विद्यार्थी एक पौधा लगाए,एक युवा जलवायु परिवर्तन के प्रति अपनी जिम्मेदारी महसूस करे,एक परिवार प्रकृति संरक्षण की संस्कृति अपनाए,और दुनिया भर के लोगों के मन-मस्तिष्क में “प्रकृति बचानी चाहिए” की चेतना स्थापित हो—तो वह कीर्तिमान किसी भी किताब से बड़ा होगा।पीके शेर्पा का वास्तविक कीर्तिमान इसी दर्शन में है—“पीके शेर्पा का नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड की किताब में लिखा जाए, उससे कहीं बड़ा कीर्तिमान यह है कि प्रकृति बचाने की चेतना दुनिया के लोगों के मन और मस्तिष्क में लिखी जाए।”यदि प्रकृति को बचाना चाहिए—यह चेतना मनुष्य के भीतर जाग गई है, तो वही चेतना उनके कीर्तिमान को हमेशा जीवित रखेगी।पत्रकार, लेखक और समाज की नजर में यह यात्रापीके शेर्पा की यात्रा को विभिन्न पत्रकारों, संचारकर्मियों, लेखकों और प्रकृति प्रेमियों ने अपने-अपने शब्दों में लिखा है।किसी ने उन्हें प्रकृति संरक्षण अभियंता कहा है। किसी ने हिमालय और पर्यावरण के संदेशवाहक, किसी ने पर्यटन और प्रकृति को जोड़ने वाले व्यक्तित्व, तो किसी ने वैश्विक जलवायु जागरूकता के लिए निरंतर चलने वाले अभियानकर्मी के रूप में चित्रित किया है।इन सभी सम्मानजनक शब्दों के लिए वे आभारी हैं। लेकिन उनकी यात्रा की वास्तविक पहचान केवल एक है—“मनुष्य को प्रकृति से फिर से जोड़ने का प्रयास।”उनके लिए कीर्तिमान अंतिम मंजिल नहीं है। यदि कोई कीर्तिमान प्रकृति संरक्षण का संदेश दुनिया तक पहुँचाने में मदद करता है, तो वह एक माध्यम हो सकता है।लेकिन वास्तविक लक्ष्य है—“मनुष्य की चेतना में प्रकृति को जीवित रखना।”पीके शेर्पा का वास्तविक कीर्तिमानआज उनके जीवन के कुछ पहलू विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। प्रकृति संरक्षण की उनकी यात्रा विभिन्न देशों के साथियों से जुड़ी है। सौ से अधिक देशों के साथियों के साथ वृक्षारोपण का अनुभव है। पंचतत्वों के संतुलन का संदेश है। प्रकृति रूपांतरण, हस्तांतरण और पीढ़ी हस्तांतरण की सोच है।चार दशक से अधिक लंबी यात्रा में आँसू हैं, संघर्ष हैं और जीवन के कठिन मोड़ हैं। लेकिन इन सबसे ऊपर एक विश्वास है—“प्रकृति बचेगी, तभी मानवता बचेगी।”पीके शेर्पा की इच्छा अपने नाम के कीर्तिमान से कहीं बड़ी है।नाम से बड़ा संदेश जीवित रहे।रिकॉर्ड से बड़ी प्रकृति संरक्षण की चेतना फैले।व्यक्तिगत उपलब्धि से बड़ा भावी पीढ़ी का सुरक्षित भविष्य हो।और अंततः पीके शेर्पा के जीवन का सबसे बड़ा कीर्तिमान यही है—“रिकॉर्ड गिनीज़ की किताब में नहीं, इंसान की चेतना में है।”प्रकृति बचाएँ।पंचतत्वों का संतुलन बनाए रखें।जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी के तापमान को कम करें।प्रकृति की संपदा भावी पीढ़ी को हस्तांतरित करें।और प्रकृति संरक्षण की चेतना एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुचाएँ।

पी के शेर्पा

प्रकृति की गोद से मानव चेतना तक निरंतर यात्रा पर

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