सुरंग में फंसे मजदूरों, तीर्थयात्रियों और घायलों को निकालने का प्रयास जारी; नदी किनारे मिले शवों को निकालने में कीचड़ और भूस्खलन बना बाधा
काठमांडू/रसुवा। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव के बीच नेपाल के भोटेकोशी क्षेत्र में बर्फीले तूफान के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन ने तिब्बत, रसुवा, नुवाकोट, धादिंग सहित कई इलाकों में स्थिति गंभीर कर दी है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है।राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग के उद्देश्य से डिस्ट्रिक्ट होटल बिजनेस एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश बराल तथा नेपाल सरकार के पर्यटन एवं पर्यावरण विशेषज्ञ पी.के. शेरपा रसुवा पहुंचे। दोनों ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को पूरे दिन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य में सहयोग किया।बचाव दलों द्वारा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट की सुरंग में फंसे मजदूरों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों और बाढ़ एवं भूस्खलन में घायल लोगों को भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

नदी किनारे बिखरे शवों को निकालना चुनौतीबाढ़ की तेज धार और भूस्खलन के कारण नदी किनारे कई शव बिखरे होने की सूचना है। हालांकि, अत्यधिक कीचड़, ढीली मिट्टी और लगातार बने हुए भूस्खलन के खतरे के कारण शवों को एकत्र करने में बचाव दलों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।काठमांडू डिस्ट्रिक्ट होटल बिजनेस एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश बराल ने बताया कि भूस्खलन के खतरे को देखते हुए नेपाल सरकार ने नदी के किनारे लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।भारतीय तीर्थयात्रियों के लापता होने पर चिंतासुरेश बराल ने बड़ी संख्या में भारतीय तीर्थयात्रियों के लापता होने की खबरों पर चिंता व्यक्त की।

उनके अनुसार, कुछ भारतीय तीर्थयात्री वाहनों सहित लापता बताए जा रहे हैं। उन्होंने नेपाल सरकार से अपील की कि लापता विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की तलाश के लिए बचाव अभियान को और तेज किया जाए तथा उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जाए।उन्होंने कहा कि इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित लोगों की जान बचाना, लापता लोगों की तलाश करना और घायलों को तत्काल उपचार एवं सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना है।
