मृत्यु अंत नहीं, सेवा का आरंभ है’— मोतीलाल डहरिया के देहदान से चिकित्सा शिक्षा को मिला नया बल

जांजगीर-चांपा/बिलासपुर। जीवन की अंतिम सांसों के बाद भी समाज के काम आने की भावना हर किसी के मन में नहीं होती। जांजगीर-चांपा निवासी स्वर्गीय मोतीलाल डहरिया (69 वर्ष) ने अपने देहदान के माध्यम से मानवता, चिकित्सा शिक्षा एवं समाजसेवा की एक प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत की है।
स्वर्गीय मोतीलाल डहरिया के निधन के पश्चात उनके परिजनों ने उनकी इच्छा के अनुरूप देहदान करने की इच्छा व्यक्त करते हुए इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी ऑर्गन डोनेशन कमेटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा, रायपुर से संपर्क किया। चूंकि स्वर्गीय डहरिया जांजगीर-चांपा के निवासी थे, इसलिए उनका देहदान छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS), बिलासपुर में किया जाना था।
इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी ऑर्गन डोनेशन कमेटी द्वारा ‘प्रयास – अ स्मॉल स्टेप फाउंडेशन’ से संपर्क कर देहदान की आवश्यक प्रक्रिया एवं कागजी कार्यवाही में सहयोग का आग्रह किया गया। संस्था द्वारा पूर्व में भी देहदान की प्रक्रियाओं में सहयोग किया जा चुका है। संस्था ने तत्परता से सहमति प्रदान करते हुए आवश्यक सहयोग किया।
स्वर्गीय मोतीलाल डहरिया की इच्छा थी कि मृत्यु के पश्चात उनका शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं मानव सेवा के कार्य में उपयोगी हो। उनकी इस अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी धर्मपत्नी कौशिल्या डहरिया एवं उनके पुत्र गुहा राम ने समस्त परिजनों की सहमति से उनका पार्थिव शरीर CIMS मेडिकल कॉलेज, बिलासपुर को देहदान किया।
प्रयास – अ स्मॉल स्टेप फाउंडेशन के सदस्य सत्या चंद्राकर के सहयोग से आवश्यक प्रक्रिया एवं औपचारिकताएं पूर्ण करने के उपरांत स्वर्गीय डहरिया का पार्थिव शरीर CIMS, बिलासपुर के एनाटॉमी विभाग को सौंप दिया गया।
मृत्यु के बाद भी जीवित रहेगी उनकी सीख
स्वर्गीय मोतीलाल डहरिया का देहदान केवल शरीर का दान नहीं, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, ज्ञान एवं मानव सेवा के लिए अमूल्य योगदान है। उनका यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा तथा समाज में अंगदान एवं देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
परिजनों ने कहा कि परिवार के प्रिय सदस्य को खोने का दुख निश्चित रूप से है, लेकिन इस बात का संतोष भी है कि उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान किया गया और उनका शरीर अब चिकित्सा विद्यार्थियों के अध्ययन एवं मानव सेवा के लिए उपयोगी होगा।
परिजनों ने प्रयास – अ स्मॉल स्टेप फाउंडेशन एवं इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी ऑर्गन डोनेशन कमेटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा, रायपुर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देहदान की प्रक्रिया में जिस तत्परता एवं संवेदनशीलता के साथ सहयोग प्रदान किया गया, उसके लिए वे सदैव आभारी रहेंगे।
स्वर्गीय मोतीलाल डहरिया का यह पुनीत कार्य समाज को यह संदेश देता है कि मृत्यु जीवन का अंत हो सकती है, लेकिन मानवता के लिए योगदान का नहीं।
इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी ऑर्गन डोनेशन कमेटी
छत्तीसगढ़ राज्य शाखा, रायपुर
प्रयास – अ स्मॉल स्टेप फाउंडेशन, छत्तीसगढ़

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