गर्भवती महिला की डॉप्लर रिपोर्ट को लेकर गंभीर सवाल, पहली जांच में गंभीर स्थिति तो दूसरी जांच में सामान्य रिपोर्ट

परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की

रायपुर। संतोषी नगर स्थित श्री साईं एडवांस इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच रिपोर्ट को लेकर 8 माह की गर्भवती महिला के परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का आरोप है कि 02 सितंबर 2026 को कराई गई डॉप्लर जांच की रिपोर्ट में गर्भस्थ शिशु के रक्त प्रवाह से संबंधित गंभीर स्थिति बताई गई, जिसके बाद परिवार में चिंता और मानसिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

रिपोर्ट में गंभीर स्थिति का उल्लेख

परिजनों के अनुसार, श्री साईं डायग्नोस्टिक सेंटर की रिपोर्ट में “Absent diastolic flow in fetal MCA with increased PI” तथा Cerebroplacental Ratio 3.374 (99 Percentile) जैसी बातें दर्ज थीं। रिपोर्ट लेकर जब परिजन डॉ. अहिल्या पटेल के पास पहुंचे, तो उन्हें रिपोर्ट के आधार पर बच्चे को गर्भ में रखने अथवा तत्काल डिलीवरी जैसे महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर चिंता जताई गई।

दूसरी जांच में सामने आई सामान्य रिपोर्ट

गंभीर रिपोर्ट मिलने के बाद परिवार ने एहतियात के तौर पर दूसरी चिकित्सकीय राय लेने का फैसला किया। इसके बाद सुंदर नगर स्थित SRS Diagnostics में दोबारा डॉप्लर जांच कराई गई। परिजनों का कहना है कि दूसरी जांच में स्थिति सामान्य बताई गई और पहली रिपोर्ट से अलग निष्कर्ष सामने आया।

आम मरीज आखिर दूसरी जांच क्यों करवाए?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कोई मरीज एक डायग्नोस्टिक सेंटर से जांच करवाता है, तो वह उसी रिपोर्ट को सही मानकर आगे डॉक्टर से उपचार की उम्मीद करता है। आम मरीज मेडिकल रिपोर्ट की तकनीकी भाषा को समझने में सक्षम नहीं होता और न ही हर व्यक्ति के लिए बार-बार अलग-अलग सेंटर में जांच करवाना संभव है।

खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीज और उनके परिजन जांच रिपोर्ट पर पूरा भरोसा करते हैं। यदि किसी रिपोर्ट के आधार पर उन्हें गंभीर स्थिति बताई जाती है, तो वे उसी के आधार पर बड़ा चिकित्सकीय निर्णय ले सकते हैं।

दूसरी राय नहीं लेते तो जिम्मेदारी किसकी होती?

परिजनों का कहना है कि उन्होंने समय रहते दूसरी जांच कराने का निर्णय लिया, इसलिए उन्हें दोनों रिपोर्टों के बीच अंतर की जानकारी मिल सकी। लेकिन यदि दूसरी जांच नहीं कराई जाती और पहली रिपोर्ट के आधार पर कोई बड़ा निर्णय ले लिया जाता, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?

यही सवाल अब स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों के सामने भी है।

स्वास्थ्य विभाग से तत्काल संज्ञान की मांग

परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले में तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। दोनों जांच रिपोर्टों का विशेषज्ञ चिकित्सकों से परीक्षण कराया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि रिपोर्टों में अंतर क्यों आया।

साथ ही संबंधित डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच प्रक्रिया, मशीनों की गुणवत्ता, रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया तथा आवश्यक विशेषज्ञ एवं तकनीकी स्टाफ की भूमिका की भी जांच की जाए।

परिजनों की मांग है कि यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या गलत रिपोर्टिंग की पुष्टि होती है, तो संबंधित डायग्नोस्टिक सेंटर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। जांच पूरी होने तक सेंटर की संबंधित जांच सेवाओं पर रोक लगाने पर भी सक्षम अधिकारियों द्वारा विचार किया जाए।

मरीजों के भरोसे का सवाल

यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि उन सभी मरीजों के भरोसे का सवाल है जो अपनी जांच रिपोर्ट को सही मानकर आगे इलाज का निर्णय लेते हैं। स्वास्थ्य विभाग को मामले को गंभीरता से लेते हुए सच्चाई सामने लानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

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