आदिवासी मुख्यमंत्री के प्रदेश में आदिवासी हॉस्टल से 15 वर्षीय आदिवासी बालक 45 दिन से लापता

45 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली, आखिर कहां है देवव्रत ध्रुव? परिवार का रो-रोकर बुरा हाल, जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
बलौदाबाजार

आदिवासी मुख्यमंत्री के प्रदेश में एक 15 वर्षीय आदिवासी बालक का सरकारी आदिवासी छात्रावास से रहस्यमय तरीके से लापता होना और करीब 45 दिन बीत जाने के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिलना पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्राम लिमाही, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा निवासी छात्र देवव्रत ध्रुव, पिता स्व. दौलत ध्रुव, उम्र 15 वर्ष, शासकीय प्री. मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास अर्जुनी में रहकर अध्ययन कर रहा था। मिली जानकारी अनुसार 30 जुलाई 2026 की सुबह करीब 7 बजे वह छुट्टी का आवेदन लिखकर छात्रावास से कहीं चला गया, जिसके बाद आज तक घर वापस नहीं लौटा।
परिवार की ओर से 3 अगस्त 2026 को ग्रामीण थाना भाटापारा में गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई गई। इसके बाद परिजनों ने अपने स्तर पर देवव्रत के मित्रों, रिश्तेदारों और आसपास के संभावित स्थानों पर लगातार तलाश की, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।

45 दिन से मां की आंखें बेटे की राह देख रही हैं

एक मां के लिए इससे बड़ी पीड़ा क्या होगी कि उसका 15 वर्षीय बेटा घर से निकले और फिर वापस ही न लौटे। देवव्रत की मां और भाई का रो-रोकर बुरा हाल बताया जा रहा है। परिवार की हर सुबह उम्मीद के साथ शुरू होती है कि शायद आज बेटा लौट आएगा, लेकिन हर शाम निराशा लेकर आती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 15 साल का नाबालिग बालक आखिर गया कहां? वह किस स्थिति में है? सुरक्षित है भी या नहीं?

सरकारी छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल

बालक का सरकारी आदिवासी छात्रावास से चले जाना और इतने लंबे समय तक उसका पता नहीं चलना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि छात्रावास की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है। आखिर नाबालिग छात्र छात्रावास से बाहर कैसे चला गया? उसकी तलाश के लिए तत्काल क्या कदम उठाए गए? छात्रावास प्रबंधन और संबंधित विभाग ने पुलिस को समय पर क्या जानकारी दी? इन सवालों का जवाब कौन देगा?

पुलिस प्रशासन आखिर कब जागेगा?

परिवार की पीड़ा और 45 दिनों की लंबी अवधि के बावजूद यदि एक नाबालिग बालक का सुराग नहीं मिल पा रहा है, तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। क्या पुलिस ने बालक के संभावित ठिकानों, मित्रों, संपर्कों और अन्य सुरागों की गंभीरता से जांच की? क्या उसके आने-जाने के संभावित रास्तों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल की गई?
परिवार का कहना है कि वे अपने स्तर पर लगातार खोजबीन कर रहे हैं, लेकिन अब तक देवव्रत के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है।
एक 15 वर्षीय बालक 45 दिनों से लापता है- यह सामान्य गुमशुदगी का मामला नहीं, बल्कि एक नाबालिग की जिंदगी और सुरक्षा का सवाल है। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि मामले को प्राथमिकता देते हुए विशेष टीम गठित कर हर संभावित एंगल से जांच तेज करे और बालक को जल्द से जल्द खोजकर सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाए।

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