नेशनल लोक अदालत में 18,121 प्रकरणों का निराकरण, 1.08 करोड़ से अधिक की अवार्ड राशि

मुंगेली। वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन शनिवार 12 सितंबर को जिला न्यायालय मुंगेली, तहसील न्यायालय लोरमी एवं जिले के विभिन्न राजस्व न्यायालयों में किया गया। लोक अदालत के माध्यम से कुल 18,121 प्रकरणों का निराकरण किया गया। निराकृत प्रकरणों में कुल 1 करोड़ 8 लाख 57 हजार 596 रुपए की अवार्ड राशि पारित की गई।

जिला न्यायालय मुंगेली में नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ सुबह 10.30 बजे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिजा देवी मेरावी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति रही।

15 खंडपीठों का किया गया गठन

नेशनल लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए जिला न्यायालय मुंगेली में कुल 6 खंडपीठ, तहसील न्यायालय लोरमी में 1 खंडपीठ तथा राजस्व न्यायालयों में कुल 8 खंडपीठों का गठन किया गया था। इन खंडपीठों के समक्ष न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन प्रकरण भी सुनवाई के लिए रखे गए।

लोक अदालत में कुल 22,686 प्रकरण सुनवाई के लिए प्रस्तुत किए गए थे। इनमें न्यायालयों में लंबित 2,240 प्रकरण तथा जिला न्यायालय एवं राजस्व न्यायालयों में प्रस्तुत 20,446 प्री-लिटिगेशन प्रकरण शामिल थे।

लंबित 1,907 मामलों का हुआ निराकरण

नेशनल लोक अदालत में न्यायालय में लंबित कुल 2,240 प्रकरणों में से 1,907 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इन मामलों में कुल 73,99,926 रुपए की अवार्ड राशि पारित की गई।

इसी प्रकार प्री-लिटिगेशन के कुल 20,446 प्रकरणों में से 16,214 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इन प्रकरणों में कुल 34,57,670 रुपए की राशि का अवार्ड पारित किया गया।

इस तरह न्यायालय में लंबित तथा प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को मिलाकर कुल 18,121 प्रकरणों का निराकरण हुआ और कुल 1,08,57,596 रुपए की अवार्ड राशि पारित की गई।

भूमि विवाद का आपसी सहमति से समाधान

नेशनल लोक अदालत में आपसी सुलह और समझौते के माध्यम से विवादों के निराकरण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी सामने आया। प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी/मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुंगेली सतीश कुमार खाखा की खंडपीठ के समक्ष न्यायालय में लंबित एक सिविल प्रकरण में भूमि के विक्रय से संबंधित विवाद रखा गया था।

खंडपीठ द्वारा दोनों पक्षों को आपसी समझौते और सुलह के माध्यम से विवाद का समाधान करने के लिए समझाइश दी गई। इसके बाद दोनों पक्षों के मध्य सहमति बनी। सहमति के आधार पर विवादित भूमि के संबंध में प्रतिवादी द्वारा वादी के पक्ष में रजिस्टर्ड विक्रयनामा निष्पादित किया गया।

इसके पश्चात शनिवार 12 सितंबर को आयोजित नेशनल लोक अदालत में दोनों पक्षों की संतुष्टि एवं सहमति के आधार पर प्रकरण में अधिनिर्णय पारित किया गया। इस प्रकार मामले का राजीनामा के आधार पर निराकरण किया गया। लोक अदालत के माध्यम से लंबे समय से चले आ रहे विवाद का आपसी सहमति से समाधान होने पर पक्षकारों को न्यायालयीन प्रक्रिया से राहत मिली।

सुलह और समझौते से त्वरित न्याय पर जोर

नेशनल लोक अदालत का उद्देश्य पक्षकारों को आपसी सुलह एवं समझौते के माध्यम से सरल, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। लोक अदालत में मामलों के निराकरण से पक्षकारों को समय और धन दोनों की बचत होती है। साथ ही आपसी सहमति से विवाद समाप्त होने के कारण पक्षकारों के बीच संबंधों को बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित नेशनल लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों के साथ अधिवक्ताओं एवं संबंधित विभागों ने भी सहयोग किया। बड़ी संख्या में पक्षकारों ने लोक अदालत की प्रक्रिया में भाग लेकर अपने लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का समाधान कराया।

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