17 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे नान प्रभारी पर उठे सवाल, कार्रवाई नहीं होने से मिलर्स में नाराजगी


बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के सीडब्ल्यूसी-1 एवं सीडब्ल्यूसी-2 के प्रभारी अमृतांशु शुक्ला के पिछले 17 वर्षों से भाटापारा में पदस्थ रहने को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। बलौदाबाजार मिलर प्रतिनिधि चेतन महिलांगे ने आरोप लगाया है कि इतने लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारी के संबंध में कई बार शिकायतें और आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
चेतन महिलांगे ने बताया कि इस मामले को लेकर समय-समय पर उनके द्वारा, रेशम महिलांगे, राइस मिल एसोसिएशन के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों तथा पार्षदों द्वारा अलग-अलग स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। कई आवेदन संबंधित विभाग के अधिकारियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, विभागीय मंत्री तथा मुख्यमंत्री तक भेजे गए, लेकिन आज तक शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि सामान्यतः प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों और कर्मचारियों का समय-समय पर स्थानांतरण किया जाता है, ताकि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की एकाधिकार जैसी स्थिति निर्मित न हो। इसके विपरीत एक अधिकारी का 17 वर्षों तक एक ही स्थान पर बने रहना कई सवाल खड़े करता है।

कार्रवाई नहीं होने से मिलर्स में बढ़ रही नाराजगी

मिलर प्रतिनिधियों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से राइस मिलर्स के बीच असंतोष का माहौल है। एसोसिएशन से जुड़े लोगों का आरोप है कि उनकी समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। कई बार ज्ञापन सौंपने और अधिकारियों से मुलाकात करने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
राइस मिल एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि यदि शिकायतें निराधार हैं तो इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए, और यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

लंबे समय से लंबित मामलों के कारण मिलर्स स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

राजनीतिक संरक्षण की चर्चा
मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लगातार शिकायतों और आवेदनों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के कारण यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी को किसी प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्ति या बड़े नेता का संरक्षण प्राप्त हो सकता है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कार्रवाई के अभाव में ऐसे सवाल लगातार उठ रहे हैं।

पारदर्शिता के लिए जांच की मांग

चेतन महिलांगे ने शासन और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सभी शिकायतों और आवेदनों की समीक्षा की जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों के मामलों की भी समय-समय पर समीक्षा आवश्यक है।

मिलर्स और शिकायतकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि शासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायतों की जांच कराएगा और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल कार्रवाई नहीं होने से राइस मिल एसोसिएशन और मिलर्स के बीच नाराजगी बनी हुई है।

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