28 वर्षों से अपनी विश्वसनीयता और उत्कृष्ठ शिक्षा के क्षेत्र में बना मिसाल आईसेक्ट चांपा

विगत 28 वर्षों से गढ़ रहा है युवाओं का भविष्य

चांपा। अपनी विश्वसनीयता के कारण तकनीक और डिजिटल क्रांति के इस दौर में कंप्यूटर शिक्षा और रोजगार की पहली सीढ़ी बन चुकी है, चांपा नगर कोरवा पारा स्थित आईसेक्ट कंप्यूटर कॉलेज गुप्ता इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी विगत 28 वर्षों से क्षेत्र के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। संस्थान ने अपनी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उत्कृष्ट मार्गदर्शन के दम पर सफलता के शानदार 28 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। संस्थान ने इस लगभग तीन दशक के सफर में 8500 से अधिक छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित कर सफल बनाया है। अधिकतर छात्र-छात्राओं ने डीसीए, पीजीडीसीए, बीसीए जैसे महत्वपूर्ण कंप्यूटर कोर्सेस में प्रशिक्षण लेकर उत्तीर्ण हुए हैं। आज यहाँ के पढ़े हुए विद्यार्थी न केवल जांजगीर चांपा बल्कि पूरे प्रदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं।
शासकीय और निजी क्षेत्रों में लहराया परचम
आईसेक्ट कंप्यूटर कॉलेज चांपा से कंप्यूटर की बारीकियां सीखने वाले युवा आज अनेकों प्रतिष्ठित शासकीय और गैर-शासकीय संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। संस्थान के छात्र आज: राजस्व विभाग में पटवारी के पद पर, पुलिस कार्यालयों में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में, धान खरीदी केंद्रों में कंप्यूटर ऑपरेटर के दायित्वों का निर्वहन, शिक्षा के क्षेत्र में लेक्चरर (व्याख्याता) के पदों पर कार्यरत हैं।
इसके अलावा सैकड़ों छात्र देश-विदेश की नामी प्राइवेट कंपनियों और संस्थानों में भी ऊंचे पदों पर कार्य कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

अनुभवी प्रशिक्षक और भव्य कंप्यूटर लैब है पहचान
संस्थान की इस गौरवमयी सफलता के पीछे यहाँ का अनुशासित माहौल, आधुनिक कंप्यूटर लैब और अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन है। जिसके कारण आज जांजगीर चांपा और आस-पास के ग्रामीण अंचलों के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर शिक्षा का सबसे भरोसेमंद केंद्र बन चुका है। यदि कंप्यूटर के क्षेत्र में अपने भविष्य की शुरुआत करना है तो यह संस्थान आपके सपनों को उड़ान दे सकता है।
इस संबंध में संस्था प्रमुख डॉ. मूलचन्द गुप्ता ने बताया कि “हमारा एकमात्र उद्देश्य क्षेत्र के युवाओं को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और तकनीकी रूप से इतना सक्षम बनाना है कि वे रोजगार के बाजार में सीधे कम्पटीशन कर सकें। 28 वर्षों का यह सफर क्षेत्र की जनता के विश्वास के बिना अधूरा था।”

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