48 घंटे के नोटिस के बाद प्रशासन सख्त, पुनर्वास की मांग पर अड़े ग्रामीण; सांसद से लगाई न्याय की गुहार,
रायपुर, 27 जून। राजधानी रायपुर के माना क्षेत्र स्थित नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। 48 घंटे के भीतर मकान खाली करने के नोटिस के बाद गांव में तनाव चरम पर पहुंच गया है। एक ओर जिला प्रशासन इसे सरकारी भूमि पर नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इसे अपने पुश्तैनी आशियाने को उजाड़ने की साजिश बताते हुए विरोध पर उतर आए हैं।
शुक्रवार रात भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन द्वारा नोटिस चस्पा किए जाने के बाद वार्ड 16 और 17 के सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए। बड़ी संख्या में महिलाएं भी अपने घरों की सुरक्षा के लिए मोर्चा संभाले रहीं। शनिवार सुबह ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल सांसद बृजमोहन अग्रवाल के निवास पहुंचा और बेदखली रोकने की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत नकटी की आमसभा पहले ही प्रस्ताव के खिलाफ लिखित आपत्ति दर्ज करा चुकी है, लेकिन प्रशासन ने उसे नजरअंदाज कर दिया। उनका दावा है कि कार्रवाई होने पर 1300 से अधिक लोगों का पूरा गांव प्रभावित होगा। ग्रामीणों का आरोप है कि 25 जून की बैक-डेट वाला नोटिस 26 जून की रात चस्पा किया गया, जिससे उन्हें अपनी बात रखने या वैकल्पिक व्यवस्था करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि वे पीढ़ियों से इस भूमि पर निवास कर रहे हैं। कई मकानों का निर्माण सरकारी योजनाओं के तहत हुआ है तथा गांव में सरकारी सांस्कृतिक भवन और पानी की टंकी जैसी सार्वजनिक सुविधाएं भी मौजूद हैं। ऐसे में अब उसी भूमि को अवैध कब्जा बताकर खाली कराने की कार्रवाई समझ से परे है। उनका आरोप है कि बिना पुनर्वास या वैकल्पिक आवास की व्यवस्था किए उन्हें बेघर किया जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह की कार्रवाई का प्रयास हुआ था, जिसे जनआंदोलन के बाद रोक दिया गया था।
वहीं, जिला प्रशासन और राजस्व विभाग का कहना है कि संबंधित 38 एकड़ भूमि सरकारी अभिलेखों में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। इस जमीन पर प्रस्तावित विधायक कॉलोनी का निर्माण होना है, इसलिए नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि कानून के अनुसार नोटिस जारी किए गए हैं और पूरी प्रक्रिया वैधानिक प्रावधानों के तहत की जा रही है।
प्रशासन ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहा है, जबकि ग्रामीण पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था और बेदखली पर रोक की मांग पर अड़े हुए हैं। फिलहाल नकटी गांव में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है और सभी की निगाहें प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के अगले कदम पर टिकी हैं।
