दुर्ग के कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी मानकों की खुली पोल, 8 दिन में सुधार नहीं तो होगी सीलिंग

अग्निशमन विभाग और एसडीआरएफ की संयुक्त जांच में अधिकांश संस्थानों में मिली गंभीर खामियां

दुर्ग, 29 जून 2026। लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रदेशभर में जारी सुरक्षा समीक्षा अभियान के तहत दुर्ग जिले के कोचिंग सेंटरों की जांच में गंभीर लापरवाही सामने आई है। अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा दुर्ग तथा एसडीआरएफ की संयुक्त टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में अधिकांश कोचिंग संस्थान फायर सेफ्टी मानकों पर खरे नहीं उतरे। जिला सेनानी एवं जिला अग्निशमन अधिकारी नागेंद्र कुमार सिंह ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों को आठ दिनों के भीतर आवश्यक सुधार करना होगा, अन्यथा उन्हें सील करने की कार्रवाई की जाएगी।

40 से अधिक कोचिंग संस्थानों की जांच

संयुक्त टीम ने रविवार को जोनल मार्केट, सिविक सेंटर और सेक्टर-5 क्षेत्र के लगभग 20 कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया। इससे पहले 24 और 25 जून को भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जांच अभियान चलाया गया था। अब तक लगभग 40 कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया जा चुका है, जिनमें अधिकांश जगहों पर अग्नि सुरक्षा संबंधी गंभीर कमियां पाई गईं।

अलग प्रवेश और निकास मार्ग का अभाव

जांच के दौरान सबसे बड़ी खामी यह सामने आई कि टाउनशिप क्षेत्र के अधिकांश कोचिंग सेंटरों में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग उपलब्ध नहीं हैं। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी आपातकालीन स्थिति या आग लगने की घटना के दौरान एक ही रास्ते से लोगों की आवाजाही भगदड़ और बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

निरीक्षण दल के अनुसार कई भवनों की संरचना और सीमित स्थान के कारण यह समस्या लगभग सभी संस्थानों में देखने को मिली।

सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य

अधिकारियों ने कोचिंग संचालकों को अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, आपातकालीन निकास, विद्युत सुरक्षा, अग्निशमन उपकरणों के नियमित रखरखाव तथा सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

जिला सेनानी नागेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी संस्थानों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

आठ दिन बाद होगी दोबारा जांच

अग्निशमन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आठ दिन बाद पुनः निरीक्षण किया जाएगा। जिन संस्थानों में निर्धारित समय के भीतर आवश्यक सुधार नहीं पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार सीलिंग सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने सभी शिक्षण संस्थानों से अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों का गंभीरता से पालन करें, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना की स्थिति में विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

हालिया जांच ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही नहीं, बल्कि सुरक्षित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना भी प्रत्येक कोचिंग संस्थान की समान रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

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