जांजगीर-चांपा/नवागढ़। ग्राम महंत में शासन की महत्वाकांक्षी गोठान योजना को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, गोठान के लिए चिन्हित सरकारी भूमि पर कथित रूप से धान की बुवाई कर खेती किए जाने का मामला सामने आया है। इससे ग्रामीणों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि यहां वास्तव में गोठान का निर्माण किया गया था, तो वर्तमान में वहां खेती कैसे हो रही है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासन द्वारा गोठान निर्माण के लिए सरकारी राशि स्वीकृत कर खर्च की गई थी, तो मौके पर गोठान का अस्तित्व क्यों दिखाई नहीं देता? यदि गोठान कभी बना ही नहीं या निर्माण के बाद उसका उपयोग समाप्त हो गया और भूमि पर निजी खेती की जा रही है, तो यह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का विषय है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व विभाग द्वारा संबंधित भूमि का सीमांकन कराया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि उक्त भूमि सरकारी है या निजी। साथ ही यह भी जांच हो कि गोठान निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई, कितना कार्य हुआ और वर्तमान स्थिति क्या है।
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि गोठान निर्माण के नाम पर सरकारी धन खर्च किया गया, लेकिन स्थल पर गोठान मौजूद नहीं है अथवा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर खेती की जा रही है, तो संबंधित अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत एवं राजस्व विभाग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है।
