स्वस्थ पशुधन से समृद्धि की राह: मुंगेली में 582 शिविरों ने बदली पशुपालन की तस्वीर

7.67 लाख से अधिक टीकाकरण, 67 हजार से ज्यादा पशुओं का उपचार; नस्ल सुधार और रोग नियंत्रण से किसानों की आय बढ़ाने की पहल


मुंगेली । कृषि प्रधान जिले मुंगेली में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनता जा रहा है। कलेक्टर कुंदन कुमार के मार्गदर्शन में पशुधन विकास विभाग द्वारा पशुओं के उपचार, टीकाकरण, नस्ल सुधार और रोग नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे व्यापक अभियान ने जिले में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। गांव-गांव आयोजित बहुउद्देशीय स्वास्थ्य शिविरों और आधुनिक पशु चिकित्सा सेवाओं के कारण न केवल पशुधन का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है, बल्कि दुग्ध उत्पादन और किसानों की आय में भी सकारात्मक वृद्धि देखने को मिल रही है।

उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. आर.एम. त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में 67 हजार 257 पशुओं का उपचार किया गया। इसके अलावा 1 लाख 22 हजार 804 पशुओं को दवाइयों का वितरण, 93 हजार 561 पशुओं को कृमिनाशक दवा तथा 1 लाख 9 हजार 84 पशुओं की डिटिकिंग (किलनी नियंत्रण) की गई। इन सेवाओं से हजारों पशुपालकों को सीधा लाभ मिला है।

कृत्रिम गर्भाधान से उन्नत नस्ल के हजारों बछड़ों का जन्म

जिले में पशुधन की गुणवत्ता सुधारने के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रम भी प्रभावी रूप से संचालित किया गया। इस दौरान 9 हजार 978 निकृष्ट सांडों का बंधियाकरण किया गया तथा 20 हजार 341 गाय एवं भैंसों का कृत्रिम गर्भाधान कराया गया।

इन प्रयासों का परिणाम यह रहा कि 5 हजार 685 उन्नत नस्ल के बछड़ों का जन्म हुआ, जिनमें 2 हजार 900 से अधिक मादा बछियां शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये उन्नत नस्ल की मादा बछियां भविष्य में अधिक दुग्ध उत्पादन कर पशुपालकों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

लिंग वर्गीकृत वीर्य योजना से मिला बेहतर परिणाम

छत्तीसगढ़ शासन की लिंग वर्गीकृत वीर्य योजना के तहत जिले में 123 गायों का कृत्रिम गर्भाधान कराया गया, जिसके परिणामस्वरूप 99 मादा बछियों का जन्म हुआ। इसे जिले में उच्च उत्पादक पशुधन तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

7.67 लाख से अधिक टीकाकरण, संक्रामक रोगों पर नियंत्रण

पशुओं को संक्रामक और जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए जिले के 2 लाख 59 हजार 348 पशुधन में 7 लाख 67 हजार 531 प्रतिबंधात्मक टीकाकरण किए गए।

इनमें गलघोंटू एवं एकटंगिया, खुरहा-चपका, लम्पी स्किन डिजीज, इंटरोटॉक्सीमिया तथा पीपीआर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के टीके शामिल हैं।

इसके अलावा ब्रुसेलोसिस की रोकथाम के लिए 881 बछियों का टीकाकरण तथा 4 हजार 63 पशुओं को एंटी रेबीज वैक्सीन भी लगाई गई।

582 स्वास्थ्य शिविरों से गांव-गांव पहुंचीं पशु चिकित्सा सेवाएं

ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को घर के पास ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में 582 बहुउद्देशीय पशु स्वास्थ्य एवं टीकाकरण शिविरों का आयोजन किया गया।

इन शिविरों में पशुओं का उपचार, टीकाकरण, कृमिनाशन, स्वास्थ्य परीक्षण तथा वैज्ञानिक एवं आधुनिक पशुपालन की जानकारी दी गई। साथ ही पशु रोगों की समय पर पहचान के लिए रक्त, गोबर, ट्यूबरक्लोसिस एवं जॉन्स डिजीज सहित विभिन्न प्रयोगशाला जांच भी नियमित रूप से की गईं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती

पशुधन विकास विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं, नस्ल सुधार और रोग नियंत्रण के संयुक्त प्रयासों से जिले में पशुपालन को नई दिशा मिली है। स्वस्थ पशुधन के कारण दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो रही है और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। विभाग का मानना है कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में कार्य जारी रहेगा।

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