घास भूमि पर तीन मंजिला स्कूल

आइडियल एकेडमी की मान्यता और भवन सुरक्षा पर गंभीर सवाल, कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग
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बलौदाबाजार। विकासखंड पलारी के ग्राम दतान (प.) स्थित आइडियल एकेडमी स्कूल को लेकर एक गंभीर शिकायत ने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव के एक ग्रामीण ने जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपकर आरोप लगाया है कि निजी विद्यालय का तीन मंजिला भवन कथित रूप से शासकीय घास भूमि पर निर्मित है। शिकायतकर्ता ने विद्यालय की भूमि, भवन निर्माण, मान्यता, अग्नि सुरक्षा और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई), 2009 के तहत निर्धारित मापदंडों के पालन की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायत सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विद्यालय का भवन वास्तव में शासकीय घास भूमि पर निर्मित है, तो उसे विद्यालय संचालन और मान्यता किस आधार पर प्रदान की गई? क्या मान्यता देने से पहले संबंधित विभागों ने भूमि के स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों की जांच की थी? क्या भवन निर्माण से जुड़े सभी वैधानिक दस्तावेज और सुरक्षा प्रमाण-पत्र उपलब्ध हैं? इन सवालों का जवाब अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
शासकीय भूमि पर निर्माण का आरोप, राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने विद्यालय की भूमि के स्वामित्व, खसरा एवं राजस्व अभिलेखों, भूमि उपयोग तथा भवन निर्माण से संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि यदि भूमि शासकीय घास भूमि के रूप में दर्ज है, तो उस पर निजी स्कूल का निर्माण और संचालन गंभीर प्रशासनिक जांच का विषय है।
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि विद्यालय को मान्यता प्रदान करते समय प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों की जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि मान्यता के लिए भूमि एवं भवन संबंधी किन प्रमाण-पत्रों का उपयोग किया गया था।
आरटीई के मानकों पर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने विद्यालय में शिक्षा का अधिकार अधिनियम और मान्यता संबंधी निर्धारित मापदंडों के पालन पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत के अनुसार विद्यालय में—
आपातकालीन निकास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने,
भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र और सेफ्टी ऑडिट को लेकर सवाल,
पर्याप्त खेल मैदान के अभाव,
कक्षाओं में प्रकाश और वेंटिलेशन की व्यवस्था,
शिक्षकों के लिए मानक अनुरूप स्टाफ रूम,
तथा प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति
जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर नियमों के पालन को लेकर संदेह व्यक्त किया गया है।
यदि ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह विद्यार्थियों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।
बहुमंजिला भवन में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल
तीन मंजिला विद्यालय भवन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि भवन में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्याप्त अग्नि सुरक्षा उपकरण, सुरक्षित निकासी मार्ग और अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों की व्यवस्था की जांच की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बहुमंजिला शैक्षणिक भवन में विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। ऐसे में भवन की संरचनात्मक मजबूती, अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकासी और अन्य सुरक्षा मानकों की सक्षम विभागों से जांच बेहद आवश्यक है।
हालांकि, विद्यालय के विरुद्ध लगाए गए इन सभी आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
संयुक्त जांच टीम गठित करने की मांग
शिकायतकर्ता ने जिला कलेक्टर से मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व विभाग, शिक्षा विभाग, लोक निर्माण विभाग, अग्निशमन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की संयुक्त जांच टीम गठित करने की मांग की है।
शिकायत में मांग की गई है कि—

  1. विद्यालय की भूमि के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड की जांच हो।
  2. भवन निर्माण की वैधानिकता की जांच की जाए।
  3. भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
  4. अग्नि सुरक्षा और आपातकालीन निकासी व्यवस्था का निरीक्षण हो।
  5. आरटीई एवं मान्यता के सभी निर्धारित मापदंडों की जांच की जाए।
  6. मान्यता के समय प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए।
  7. आरोप सही पाए जाने पर विद्यालय की मान्यता और संचालन के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
  8. यदि किसी अधिकारी या संस्था की लापरवाही सामने आती है, तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जाए।
    अब प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
    एक ओर विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा का सवाल है, तो दूसरी ओर शासकीय भूमि और नियमों के पालन से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। ऐसे में जिला प्रशासन के सामने अब चुनौती है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जाए।
    फिलहाल, पूरे मामले में प्रशासन की जांच का इंतजार है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और विद्यालय के संचालन एवं मान्यता के संबंध में नियमों का पालन किया गया है या नहीं।
    अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश देगा

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