नवीन महाविद्यालय के नाम नवागढ़ में सरकारी जमीन पर ‘कब्जे का खेल’!

तहसीलदार की रोक के बावजूद छुट्टी के दिनों में निर्माण का आरोप, सरकारी जमीन पर धीरे-धीरे बढ़ता कब्जा—अफसरों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

ज़िला जांजगीर चांपा नवागढ़। सरकारी जमीन की हिफाजत करने वाला प्रशासन आखिर सरकारी जमीन को बचाने में कितना गंभीर है? नवागढ़ में शासकीय नवीन महाविद्यालय से जुड़ी जमीन को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

स्थानीय स्तर पर आरोप है कि विद्यालय/शैक्षणिक संस्था के लिए उपलब्ध सरकारी जमीन पर कथित रूप से धीरे-धीरे कब्जे की कोशिश की जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि तहसीलदार द्वारा निर्माण रोकने की बात सामने आने के बाद भी छुट्टी के दिनों में निर्माण कार्य आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

रोक का आदेश भारी या कब्जे का दबदबा?

अब नवागढ़ की जनता का सवाल बेहद सीधा है—

अगर प्रशासन ने निर्माण रोकने कहा था, तो फिर निर्माण आगे कैसे बढ़ रहा है?

क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं?

या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही?

अगर मौके पर सरकारी जमीन है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

छुट्टी का दिन बना ‘कब्जे का मौका’?

स्थानीय लोगों के अनुसार कथित निर्माण कार्य को छुट्टी के दिनों में आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

अगर यह सही पाया जाता है तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि—

क्या छुट्टी के दिन सरकारी जमीन पर कानून बदल जाता है?

क्या अधिकारियों की निगरानी छुट्टी के दिन बंद हो जाती है?

क्या कार्रवाई के डर के बिना सरकारी जमीन पर निर्माण किया जा सकता है?

ये सवाल अब सिर्फ नवागढ़ के नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

“आज थोड़ा कब्जा, कल पूरा कब्जा”—क्या प्रशासन इसी इंतजार में है?

सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर सबसे बड़ा खतरा यही होता है कि शुरुआत में छोटे स्तर पर किया गया निर्माण समय के साथ बड़ा रूप ले लेता है।

फिर वही जमीन विवाद, सीमांकन, कब्जा और कानूनी कार्रवाई के लंबे चक्र में फंस जाती है।

इसलिए सवाल यह नहीं कि अभी कितना निर्माण हुआ है—सवाल यह है कि इसे समय रहते रोका क्यों नहीं जा रहा?

बिहान दैनिक न्यूज़ के 7 सीधे सवाल

  1. जमीन का वास्तविक मालिकाना हक किसके नाम दर्ज है?
  2. क्या संबंधित जमीन शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज है?
  3. क्या मौके पर सीमांकन कराया गया है?
  4. यदि निर्माण अवैध है तो अब तक निर्माण हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  5. तहसीलदार के निर्देश के बाद भी निर्माण हुआ तो जिम्मेदार कौन है?
  6. छुट्टी के दिनों में निर्माण की शिकायतों पर निगरानी क्यों नहीं?
  7. सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिए प्रशासन अब कौन-सी ठोस कार्रवाई करेगा? अब जनता को जवाब चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं!

नवागढ़ के नागरिकों की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, राजस्व रिकॉर्ड की जांच एवं सीमांकन कराए और यदि कब्जा/निर्माण नियम विरुद्ध पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करे।

सरकारी जमीन किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है। यदि जमीन वास्तव में शासकीय है और उस पर अनधिकृत कब्जे की पुष्टि होती है, तो प्रशासन को बिना किसी दबाव के कार्रवाई करनी चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल—

“सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप है, तहसीलदार की रोक की बात है, फिर भी निर्माण कैसे?”

अब देखना होगा कि नवागढ़ प्रशासन इस मामले में कागजों से निकलकर जमीन पर उतरता है या नहीं।

बिहान दैनिक न्यूज़ की नजर रहेगी—

जमीन से लेकर दस्तावेज तक, आदेश से लेकर कार्रवाई तक… इस पूरे मामले की हर कड़ी पर।

जनता की जमीन—जनता का सवाल—जवाब देगा प्रशासन!

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