छुईखदान। कार्यक्रम में क्षेत्र सहित दूर-दराज़ से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भव्य उपस्थिति रही। बड़ी संख्या में लोग अपनी संस्कृति और परंपरा की जड़ों से जुड़ने की भावना के साथ परिवार सहित शामिल हुए। आयोजन में शासन-प्रशासन के साथ-साथ आसपास के समस्त गांवों का भी सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
महोत्सव के सफल आयोजन में शासन-प्रशासन का सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ, जिसके कारण पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा एवं व्यवस्था सुदृढ़ बनी रही। विशेष रूप से इस वर्ष सघन जांच एवं सतर्कता के चलते मादक पदार्थों के सेवन पर प्रभावी नियंत्रण रहा, जिससे आयोजन पूर्णतः शांतिपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ।
परंपरा के अनुसार, ठाकुरटोला जमींदार परिवार द्वारा सेवा-अर्जी के पश्चात ही गुफा द्वार आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इस परंपरा का निर्वहन करते हुए इस वर्ष परिवार के वंशज श्री लाल रोहित सिंह पुलस्त्य द्वारा विधिवत सेवा-अर्जी कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
स्थानीय मान्यता के अनुसार, किसान संस्कृति में किसानी बच्छर (वर्ष) का प्रमुख एवं प्रथम पर्व “अक्ति” के अवसर पर क्षेत्रवासी ठाकुरदेव की सेवा-अर्जी कर फसलोत्पादन हेतु “बीज गाड़ा” लाकर खेती कार्य प्रारंभ करने से पूर्व मंढीपखोल बाबा को अच्छी फसल एवं समृद्ध खेती की कामना के साथ जोहार भेंट अर्पित करते हैं।
मंढीपखोल की गुफा अपने आप में एक अद्भुत प्राकृतिक आश्चर्य है। भीषण गर्मी के मौसम में भी गुफा के भीतर प्रवेश करते ही प्राकृतिक रूप से “एसी” जैसी शीतलता का अनुभव होता है। गुफा अत्यंत विशाल एवं बहु-भागीय संरचना वाली है, जहां एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहज रूप से प्रवेश कर भ्रमण करते हैं। गुफा के भीतर प्राकृतिक रूप से निर्मित मनोहारी दृश्य, विभिन्न कक्षों की संरचना तथा रहस्यमयी वातावरण इसे और भी आकर्षक बनाते हैं।
यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत और जनआस्था का अद्वितीय संगम है, जो पीढ़ियों से लोगों की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।
समस्त आयोजन अनुशासित एवं सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ, जिसने क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं एवं सामाजिक एकता को और अधिक सुदृढ़ करने का कार्य किया।
