भानुप्रतापपुर। जिले के भानुप्रतापपुर ब्लॉक स्थित आरी डोंगरी कच्चे माइंस में एक बड़ा वित्तीय घोटाला और नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। चर्चा है कि पिछले कुछ वर्षों में सीएसआर मद की राशि में लगभग 872.67 लाख रुपये का बड़ा हेर-फेर किया गया है। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि वन विभाग की अनुमति की आड़ में आरक्षित वन क्षेत्र में नियम विरुद्ध तरीके से पक्की सड़क का निर्माण कर दिया गया है।
यह मामला केवल एक सड़क निर्माण का नहीं, बल्कि पर्यावरण नियमों की अनदेखी और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का है। यदि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होती है, तो कई बड़े चेहरों से नकाब उतरना तय है।
नियमों की धज्जियां: वन मार्ग पर कैसे बना ‘परमानेंट स्ट्रक्चर’?
मामला साल्हे चौक से कच्चे माइंस तक जाने वाली 2000 मीटर सीसी सड़क और आरसीसी रिटेनिंग वॉल के निर्माण से जुड़ा है। जानकारों के अनुसार, यह मार्ग पूर्व भानुप्रतापपुर वनमंडल के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक- 608 के अंतर्गत आता है। वन विभाग के नियमों के अनुसार, वन भूमि पर किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण करना प्रतिबंधित है। गोदावरी माइंस द्वारा वर्ष 2021 में ‘मार्ग उन्नयन’ के लिए मिली अनुमति को आधार बनाकर यहाँ कंक्रीट की पक्की सड़क और रिटेनिंग वॉल खड़ी कर दी गई, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
872.67 लाख रुपये के बंदरबांट की आशंका
सीएसआर फंड, जो स्थानीय ग्रामीणों के विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए होता है, उसे लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि माइंस प्रबंधन और संबंधित विभागों की मिलीभगत से लगभग 9 करोड़ रुपये सड़क निर्माण के नाम पर ठिकाने लगा दिए गए। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं के नाम पर भी करोड़ों की राशि कागजों पर खर्च कर दी गई है, जबकि धरातल पर स्थिति जस की तस है।
ग्रामीणों की परेशानी को बनाया ‘हथियार’
उल्लेखनीय है कि कच्चे आरीडोंगरी क्षेत्र के 138.96 हेक्टेयर क्षेत्र पर लौह अयस्क खनन किया जा रहा है। यहाँ से भारी वाहनों के परिवहन के कारण डोंगरीपारा से दफाईपारा मार्ग अत्यंत जर्जर हो चुका था। ग्राम पंचायत कच्चे द्वारा मार्ग मरम्मत हेतु आवेदन दिया गया था। इसी का फायदा उठाते हुए, माइंस प्रबंधन ने मरम्मत के नाम पर वन भूमि पर नियम विरुद्ध पक्का निर्माण कर दिया और करोड़ों रुपये की राशि को खपा दिया।
मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं
अनुमति का दुरुपयोग: क्या ‘उन्नयन’ की अनुमति में सीसी रोड निर्माण का प्रावधान था?
विभाग की चुप्पी: वन विभाग की नाक के नीचे आरक्षित वन कक्ष क्रमांक- 608 में पक्का निर्माण कैसे पूरा हो गया?
सीएसआर ऑडिट: शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर खर्च दिखाई गई राशि का वास्तविक लाभ ग्रामीणों को मिला या नहीं?
