मानवाधिकार चेतना, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व पर हुआ सारगर्भित संवाद
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) द्वारा दिनांक 15 मार्च 2026 को “Women Rights and Legal Protection (महिला अधिकार एवं कानूनी सुरक्षा)” विषय पर एक राष्ट्रीय स्तर का ऑनलाइन वेबिनार सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस वेबिनार का उद्देश्य महिलाओं के अधिकारों, उनकी कानूनी सुरक्षा, संवैधानिक संरक्षण तथा समाज में उनके सम्मान और समानता के महत्व पर व्यापक संवाद स्थापित करना था। देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े पदाधिकारियों, सदस्यों, शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों एवं जागरूक नागरिकों ने इस वेबिनार में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज की प्रगति का वास्तविक मानदंड वहाँ की महिलाओं की स्थिति और उनके अधिकारों की सुरक्षा से निर्धारित होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और संविधान दोनों ही महिलाओं को सम्मान और समानता का अधिकार प्रदान करते हैं, किंतु इन मूल्यों को व्यवहारिक रूप से समाज में स्थापित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। डॉ. रणधीर कुमार ने यह भी कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा केवल कानूनों के माध्यम से ही संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामाजिक जागरूकता, संवेदनशीलता और नैतिक प्रतिबद्धता भी आवश्यक है।
वेबिनार में मुख्य वक्ता (Chief Speaker) के रूप में श्री जितेंद्र पुरोहित, प्रदेश कानूनी सलाहकार, ने महिलाओं से संबंधित प्रमुख कानूनों और उनके व्यावहारिक पक्षों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय संविधान में महिलाओं को दिए गए अधिकारों, घरेलू हिंसा अधिनियम, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, दहेज निषेध कानून, तथा अन्य महत्वपूर्ण विधिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया कि इन कानूनों का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और न्यायपूर्ण वातावरण प्रदान करना है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि कानूनों का उपयोग संतुलित और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से होना चाहिए, ताकि न्याय और सामाजिक संतुलन दोनों बनाए रखे जा सकें।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि (Chief Guest) के रूप में छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष श्री जतिंदर पाल सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक अभियान नहीं, बल्कि मानवाधिकारों की मूल भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग—परिवार, प्रशासन, नागरिक संगठनों और युवाओं—को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जागरूकता कार्यक्रम और संवाद ही ऐसे माध्यम हैं जिनके द्वारा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
वेबिनार का संचालन राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर प्रभात मिश्रा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की स्थिति के ऐतिहासिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य, भारतीय संविधान में महिलाओं के अधिकार, वर्तमान कानूनी व्यवस्थाएँ, तथा महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े समकालीन मुद्दों पर गंभीर और विचारोत्तेजक चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से प्रश्नोत्तर सत्र में भाग लेते हुए विभिन्न जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं, जिनका विशेषज्ञों द्वारा संतुलित और व्यावहारिक उत्तर दिया गया।
चर्चा के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि महिला अधिकार केवल विधिक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और मानव गरिमा से जुड़ा हुआ प्रश्न है। समाज में समानता, सम्मान और न्याय की स्थापना तभी संभव है जब महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए और उन्हें एक सुरक्षित एवं समर्थ वातावरण प्रदान किया जाए।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि मानवाधिकारों की रक्षा और महिला सशक्तिकरण के लिए केवल कानूनों का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और सामाजिक स्वीकार्यता भी उतनी ही आवश्यक है। NHRCCB द्वारा भविष्य में भी इसी प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों, संवादों और राष्ट्रीय वेबिनारों के माध्यम से समाज में मानवाधिकार चेतना को सशक्त बनाने के प्रयास जारी रखे जाएंगे।
राष्ट्रीय कार्यालय
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB)
🌐 www.nhrccb.org�
