खैरागढ़ । ब्लॉक के जालबांधा के समीप स्थित ग्राम पेटी इन दिनों एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। पिछले 4–5 दिनों में यहां 15 से अधिक मवेशियों की लगातार मौत ने पूरे गांव में दहशत का माहौल बना दिया है। पशुपालकों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है और ग्रामीणों के सामने बड़ी आर्थिक व मानसिक परेशानी खड़ी हो गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि मवेशियों में किसी अज्ञात बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं—जानवर अचानक चक्कर खाकर गिर रहे हैं, कुछ मामलों में आक्रामक व्यवहार भी देखने को मिला है।
ग्रामीणों का आरोप है कि महज 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित जालबांधा पशु औषधालय खुद “बीमार” है। यहां पदस्थ पशु चिकित्सा अधिकारी मुख्यालय में नहीं रहते और सप्ताह में एक-दो बार ही अस्पताल पहुंचते हैं। कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण न तो समय पर इलाज मिल पा रहा है और न ही टीकाकरण अभियान संचालित हो रहा है। बताया जा रहा है कि आसपास के गांवों में लंबे समय से पशुओं का टीकाकरण बंद पड़ा है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा और बढ़ गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ यहाँ पदस्थ पशु चिकित्सा अधिकारी का राजनितिक पहुंच होने के कारण मनमौजी तरीके से अस्पताल का संचालन कर रहे है जिससे सत्ता सरकार की किरकिरी हो रही है.
गर्मी के इस मौसम में हालात और गंभीर हो गए हैं। लगातार हो रही मौतों से ग्रामीणों में भय व्याप्त है कि कहीं यह बीमारी बड़े स्तर पर न फैल जाए। कई पशुपालकों ने विभागीय कर्मचारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। यह पूरा मामला पशु चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। जब नजदीक में अस्पताल होने के बावजूद पशुओं को इलाज नहीं मिल पा रहा, तो यह लापरवाही साफ नजर आती है। अब जरूरत है कि प्रशासन तुरंत हस्तक्षेप करे, बीमारी की जांच के लिए विशेषज्ञ टीम भेजे और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके और मवेशियों की मौत पर रोक लग सके।
