मां जन्मदात्री हो या संस्कार दात्री ! मां सिर्फ मां होती हैं
जांजगीर-चांपा । मां , ये एक शब्द नहीं बल्कि इस शब्द में पूरी सृष्टि का सार हैं । चाहे वो जन्मदात्री हो जिसने कोख में नौ महीने रखी , या संस्कारदात्री हो जिसने उंगली पकड़कर चलना , बोलना और जीवन में जीना सिखाया , मां तो सिर्फ मां ही होती हैं । वह मां ही हैं जिसके रहते जिंदगी में कोई गम नहीं रहता । दुनिया साथ दे या न दे , मैंने देखा हैं कि मां का प्यार कभी-भी कम नहीं होता हैं , उसकी ममता , उसका आशीर्वाद हर मुश्किल में कवच बनकर खड़ा रहता हैं ।
शशिभूषण सोनी ने कहा कि आज मदर्स-डे के पवित्र अवसर पर मैं अपनी जन्मदात्री मां स्वर्गीय श्रीमति सीता देवी सोनी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं , जिनका आंचल जीवन-भर के लिए तो छूट गया पर आशीष आज भी साथ हैं । साथ ही मेरी संस्कार दात्री मां श्रीमति कुसुम – कृष्ण कुमार पाण्डेय मुड़पार (अफरीद ) के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम करता हूं जिन्होंने अपने संस्कारों से मुझे जीवन को संवारा ! अंतर्राष्ट्रीय मातृ दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनगिनत शुभकामना। सचमुच मां के बिना ये सृष्टि अधूरी हैं । मां हैं तो सब कुछ हैं ।
