17 लाख से अधिक मामलों का हुआ समाधान, पक्षकारों को मिली 70 करोड़ से ज्यादा की राहत
रायपुर। छत्तीसगढ़ में आयोजित वर्ष 2026 की द्वितीय नेशनल लोक अदालत में रिकॉर्ड स्तर पर प्रकरणों का निराकरण किया गया। शनिवार को जिला न्यायालय रायपुर सहित प्रदेश के सभी न्यायालयों में आयोजित इस लोक अदालत में कुल 17 लाख 5 हजार 200 प्रकरणों का आपसी सुलह और समझौते के आधार पर निपटारा किया गया। इस दौरान पक्षकारों को लगभग 70 करोड़ 66 लाख 80 हजार 997 रुपए की राहत राशि भी प्रदान की गई।
नेशनल लोक अदालत का उद्घाटन रमेश सिन्हा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किया। कार्यक्रम उनके मार्गदर्शन तथा संजय के. अग्रवाल के निर्देशन में आयोजित हुआ। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) नई दिल्ली के निर्देशानुसार तालुका स्तर से लेकर उच्च न्यायालय स्तर तक सभी न्यायालयों में राजीनामा योग्य मामलों का निराकरण किया गया।
इस बार नेशनल लोक अदालत को हाईब्रिड मोड में आयोजित किया गया, जिसमें पक्षकारों ने भौतिक उपस्थिति के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी अपने मामलों का निराकरण कराया। ई-चालानों के समाधान के लिए संबंधित यातायात थानों में विशेष व्यवस्था की गई थी, जहां लोगों ने पंजीयन कराकर अपने प्रकरणों का निपटारा कराया।
लोक अदालत के तहत “न्याय तुहर द्वार” योजना के अंतर्गत मोहल्ला लोक अदालत का आयोजन भी किया गया। खमतराई जोन क्रमांक-1 में आयोजित मोहल्ला लोक अदालत में क्षेत्रवासियों ने पानी टंकियों के आसपास असामाजिक तत्वों के जमावड़े और ठेका कर्मचारियों के अभद्र व्यवहार की शिकायत रखी। इस पर अध्यक्ष जनोपयोगी लोक अदालत ऋषी कुमार बर्मन ने संबंधित अधिकारियों को सीसीटीवी कैमरे लगाने और पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर और गुरुद्वारा धन धन बाबा साहिब जी के संयुक्त तत्वावधान में दूर-दराज से पहुंचे पक्षकारों के लिए नि:शुल्क भोजन की भी व्यवस्था की गई। इससे लोगों में संतोष और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास देखने को मिला।
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किस श्रेणी में कितने मामलों का निराकरण
राजस्व न्यायालय : 1 करोड़ 20 लाख 54 हजार 185 प्रकरण प्री-लिटिगेशन एवं नगर निगम मामले : 16 लाख 77 हजार 996 न्यायालय में लंबित प्रकरण : 27 हजार 204 ,ट्रैफिक चालान : 10 हजार 18,कुटुंब न्यायालय : 87 प्रकरण ,राज्य परिवहन अपीलीय प्राधिकरण : 8 प्रकरण
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हाईब्रिड व्यवस्था बनी आकर्षण का केंद्र
इस बार नेशनल लोक अदालत को पूरी तरह हाईब्रिड मॉडल पर संचालित किया गया। पक्षकारों को न्यायालय पहुंचने के साथ-साथ ऑनलाइन माध्यम से भी सुनवाई और समझौते की सुविधा दी गई। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिली और बड़ी संख्या में मामलों का त्वरित निराकरण संभव हो सका।
